अहोई अष्टमी: शुभ मुहूर्त के साथ जानें, कब रखें संतान रक्षा का व्रत 22-23 अक्तूबर

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Friday, October 21, 2016-3:37 PM

संतान रक्षा का व्रत अहोई अष्टमी 22 अक्तूबर के लिए विशेष

अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की आठवीं तिथि को किया जाता है। उत्तर भारत के सभी क्षेत्रों में यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व को परिवार के सुखमय जीवन से भी जुड़ा हुआ माना जाता है। इस दिन माताएं अपने बच्चों की रक्षा के लिए पूरा दिन व्रत करती हैं और शाम को दीवार पर छाप कर अहोई माता की पूजा करतीं तथा कथा सुनती हैं। अहोई माता की मूर्ति में संसार संजोया दिखाया जाता है। महिलाएं पूरे दिन व्रत रखकर रात्रि में तारे को अर्घ्य देकर अपने व्रत का समापन करती हैं। 

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संतान की उन्नति, प्रगति, सुख समृद्धि और पति की लम्बी आयु के लिए महिलाएं अहोई माता का व्रत करती हैं। यह व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पुत्रवती स्त्रियां करती हैं। अष्टमी को किया जाने वाला यह व्रत अहोई आठें अथवा अघहा अष्टमी के रूप में भी प्रसिद्ध है।


 
करवाचौथ के बाद दीपावली से एक सप्ताह पहले अहोई माता का व्रत होता है। कुछ परिवारों में यह व्रत सप्तमी को करने का भी विधान है जबकि कुछ लोग अष्टमी को ही अहोई माता का व्रत करते हैं परंतु इस बार सप्तमी व अष्टमी दोनों का व्रत एक ही दिन यानी 22 अक्तूबर को ही होगा।


अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त- 17:40 से 18:57

अवधि- 1 घंटा 17 मिनट तक

तारों को अर्ध्य देने का समय- 18:08

अहोई अष्टमी को चन्द्रोदय का समय- 23:42

अष्टमी तिथि प्रारम्भ- 22 अक्टूबर 2016 को 13:10 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त- 23 अक्टूबर 2016 को 12:28 बजे


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