भगवान कृष्ण-श्रीराम भी देते हैं प्रेरणा, नवरात्र में अवश्य करें मां दुर्गा की आराधना 

  • भगवान कृष्ण-श्रीराम भी देते हैं प्रेरणा, नवरात्र में अवश्य करें मां दुर्गा की आराधना 
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Tuesday, October 04, 2016-11:41 AM

हमारे वैदिक सनातन धर्म में शारदीय नवरात्रों एवं वासंतिक नवरात्रों का अत्यधिक महत्व है, हम सब पावन नवरात्रों के दिन मां भगवती आदि शक्ति की पूजा एवं आराधना करते हैं व व्रत रखते हैं। इनमें शारदीय नवरात्र आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक तथा वसंत नवरात्र चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से राम नवमी तक होते हैं, हर घर में अष्टमी एवं नवमी के दिन देवी की पूजा कन्या के रूप में होती है, मां भगवती सर्वसुख सौभाग्य, आरोग्य और मंगल प्रदायिनी हैं, इस दिन हम कन्या के पग पखारते हैं, पर जब हम उसी कन्या को उत्पन्न होने से पहले ही मां के गर्भ में ही नष्ट कर डालते हैं तब हमारी श्रद्धा एवं विश्वास पर प्रश्र चिन्ह लग जाता है। जब हम मां लक्ष्मी, सरस्वती तथा दुर्गा मां की पूजा कन्या भवानी के रूप में करते हैं जो भक्त शारदीय एवं वसंत नवरात्रों में मां दुर्गा की पूजा करते हैं वे सब प्रकार की बाधाओं से मुक्त होकर आनंदमय जीवन व्यतीत करते हैं।


भगवान श्री कृष्ण स्वयं श्री गीता जी में कहते हैं कि मेरी गुणमयी माया बड़ी दुस्तर है, इसका पार पाना असंभव है, जो भक्त निरंतर मेरा भजन करते हैं वे इस दुर्गम माया से तर जाते हैं।


जीव को चाहिए कि वह नवरात्र काल में संयमित जीवन व्यतीत कर अपनी चित्त वृत्तियों को एकाग्रचित कर मां भगवती दुर्गा के ध्यान में लगाएं। मां भगवती महिषासुरमर्दिनी, भगवती शाकम्भरी, भगवती दुर्गा, उमा देवी, मूल प्रकृति राधा, भ्रामरी देवी, आदि शक्ति, भुवनेश्वरी देवी तथा गायत्री इत्यादि प्रसिद्ध नामों से स्मरण करें। मां महाकाली, मां महालक्ष्मी, मां महासरस्वती आदि रूपों में पूजन करे। शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूषमांडा, स्कंदमाता, कात्यायिनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री के नामों की मंत्रध्वनि हो।


नवरात्र पर्व साधना और संयम के मनोभावों को प्रकट करने को समर्पित है। प्रभु श्री राम ने रावण वध हेतु इन्हीं नौ दिनों में मां भगवती की आराधना की। अधर्म के थपेड़ों की मार झेल रहे पांडवों को भगवान श्री कृष्ण जी ने नवरात्रों में मां दुर्गा की पूजा -अर्चना करने हेतु प्रेरणा दी जिससे पांडव युद्ध में विजयी हुए।


हमारा जीवन पवित्र एवं रोगमुक्त हो तथा जीवन में हमें किसी प्रकार की भय, बाधा का सामना न करना पड़े। हमारे जीवन में ज्ञान का प्रकाश हो तथा हमें उत्तम बुद्धि प्राप्त हो। ऐसे स्वच्छ मन में ही दैवीय गुणों का वास होता है। नवरात्र हमारे जीवन में सुखों, सद्गुणों एवं ऐश्वर्य की अभिवृद्धि करते हैं और हम हमारे तन-मन में छुपे रोग, शोक, भव बंधन, भय आदि विकारों से मुक्त होते हैं। इस प्रकार नवरात्र पूजन से हमारा गृहस्थ जीवन सुखमय बनता है।

या देवि सर्वभूषेतु शक्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।

हे आदि शक्ति भगवती मां। आप सब भूत प्राणियोंं शक्ति रूप से निवास करती हैं। आपको नमस्कार है, नमस्कार है, नमस्कार है।


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