कल मध्यान्ह में करें उपाय: लोक-परलोक में भोगेंगे सुख, जानेंगे ब्रज का रहस्य

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Thursday, September 08, 2016-10:44 AM
श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व राधा के बिना अपूर्ण है क्योंकि राधा जी ही कृष्ण की मूल शक्ति कही गई है। शास्त्रों में कृष्ण को सर्वेश्वर कहकर संबोधित किया गया है। कृष्ण का यह स्वरुप शास्त्रों में माधुर्य को दर्शाता है। यदि सर्वेश्वर कृष्ण के साथ से राधाजी को हटा दिया जाए तो सर्वेश्वर कृष्ण का व्यक्तित्व माधुर्यहीन हो जाएगा। राधा के ही कारण श्रीकृष्ण रासेश्वर और सर्वेश्वर हैं। तभी कृष्ण को राधारमण कहकर बुलाया जाता है और यही कारण है की राधा का नाम सैदेव कृष्ण से पहले आता है। इसलिए सदैव राधेश्याम राधेकृष्ण यां राधेकांत कहकर बुलाया जाता है न के कृष्ण-राधा, कांत-राधा अथवा श्याम-राधा।
 
राधाष्टमी पूजन व उपाय: दैनिकृत से निवृत्त होकर ठीक मध्यान्ह के समय राधाकृष्ण का पूजन करें। घर की उत्तर दिशा में लाल रंग का कपड़ा बिछाएं तथा मध्य भाग में चौकी पर मिट्टी या तांबे का कलश स्थापित करें। चौकी पर राधा और कृष्ण की मूर्ति यां चित्र स्थापित करें राधाकृष्ण जी को पंचामृत से स्नान कराएं। राधा जी को सोलह श्रृंगार आर्पित करें तत्पश्चात राधाकृष्ण का पंचोउपचार पूजन करें। धूप, दीप, पुष्प चंदन और मिश्री अर्पित करें तथा इस मंत्र का सामर्थ्यानुसार जाप करें। 
मंत्र: ममः राधासर्वेश्वर शरणं।। 
मंत्र जाप पूरा होने के बाद यथासंभव पूजन पश्चात उपवास करें अथवा एक समय भोजन करें और व्रत करें। पूजन पूरा होने के बाद ब्राह्मण सुहागिनों स्त्रियों को भोजन कराकर आशीर्वाद लें तथा राधा जी को अर्पित सोलह श्रृंगार ब्राह्मण सुहागिनों स्त्रियों को भेंट करें। श्रद्धा और विधिपूर्वक यह व्रत करने पर मनुष्य पापों से मुक्त हो जाता है व इस लोक और परलोक के सुख भोगता है। मनुष्य ब्रज का रहस्य जान लेता है। 
आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com 
Edited by:Aacharya Kamal Nandlal

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