श्राद्ध: आपके जीवन में भी हैं ये समस्याएं, समझ जाएं पितृ हैं नाराज

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Tuesday, September 13, 2016-11:52 AM
जो लोग दान, श्राद्ध, तर्पण आदि नहीं करते, बडे़ बुजुर्गो का आदर सत्कार नहीं करते, पितृगण उनसे हमेशा नाराज रहते हैं। इसके कारण वे या उनके परिवार के अन्य सदस्य रोगी, दुखी और मानसिक और आर्थिक कष्ट से पीड़ित रहते हैं। वे निःसंतान भी हो सकते हैं अथवा पितृदोष के कारण उनको संन्तान का सुख भी दुर्लभ रहता है। जब तक पितृ श्राद्धकर्ता की तीन पीढ़ियों तक रहते हैं (पिता, पितामह, प्रपितामह) तब तक उन्हें स्वर्ग और नर्क में भी भूख प्यास, सर्दी गर्मी का अनुभव होता है पर कर्म न कर सकने के कारण वे अपनी भूख-प्यास आदि स्वयं मिटा सकने में असमर्थ रहते हैं।
 
दिवंगत प्रियजनों की आत्माओं की तृप्ति, मुक्ति एवं श्रद्धापूर्वक की गई क्रिया का नाम ही श्राद्ध है। आश्विन मास का कृष्ण पक्ष श्राद्ध के लिए तय है। ज्योतिषीय दृष्टि से इस अवधि में सूर्य कन्या राशि पर गोचर करता है। इसलिए इसे ‘कनागत’ भी कहते हैं। जिनकी मृत्यु तिथि मालूम नहीं है, उनका श्राद्ध अमावस को किया जाता है। इसे ‘सर्वपितृ अमावस’,  ‘सर्वपितृ श्राद्ध’ भी कहते हैं। यह एक श्रद्धा पर्व है। 
 
जिनके पास समय अथवा धन का अभाव है, वे भी इन दिनों आकाश की ओर मुख करके दोनों हाथों द्वारा आवाहन करके पितृगणों को नमस्कार कर सकते हैं। श्राद्ध ऐसे दिवस हैं जिनका उद्देश्य परिवार का संगठन बनाए रखना है। विवाह के अवसरों पर भी पितृ पूजा की जाती है।
 
ज्योतिषीय दृष्टि से यदि कुंडली में पितृ दोष है तो निम्न परिणाम देखने को मिलते हैं-
* संतान न होना
 
* धन हानि 
 
* गृह क्लेश
 
* दरिद्रता 
 
* मुकद्दमे
 
* कन्या का विवाह न होना
 
* घर में हर समय बीमारी 
 
* नुक्सान पर नुक्सान
 
* धोखे
 
* दुर्घटनाएं
 
* शुभ कार्यों में विघ्न 

ज्योतिष की सलाह: पितृ दोष में अवश्य करें श्राद्ध। 


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