श्राद्ध के दिनों में न करें यह काम, घर-परिवार पर आएंगे संकट

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Wednesday, September 14, 2016-2:49 PM
16 दिवसीय महालय श्राद्ध पक्ष कहलाता है। इस समय सूर्य देव कन्या राशि में स्थित होते हैं। इस अवसर पर चंद्रमा भी पृथ्वी के काफी निकट होता है। चंद्रमा के थोड़ा ऊपर पितृलोक माना गया है। सूर्य रश्मियों पर सवार होकर पितृ पृथ्वी लोक में अपने पुत्र-पौत्रों के यहां आते हैं तथा अपना भाग लेकर शुक्ल प्रतिप्रदा को सूर्य रशिमों पर सवार होकर वापस अपने लोक लौट जाते हैं।  
 
 
श्राद्ध में पुण्य लाभ के लिए करें इन वस्तुओं का प्रयोग
किसी भी श्राद्ध में तर्पण करने के लिए तिल, जल, चावल, कुशा, गंगाजल आदि का प्रयोग आवश्य करना चाहिए परंतु केला, सफेद पुष्प, उड़द, गाय का दूध एवं घी, खीर, स्वांक के चावल, जौ, मूंग, गन्ना आदि से किए गए श्राद्ध से पितर अति प्रसन्न होते हैं। तुलसी,आम और पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं तथा सूर्यदेवता को प्रात: अर्ध्य दें। चांदी के पात्रों का प्रयोग अधिक लाभदायक है। 
 
श्राद्ध में क्या करें
जिस दिन किसी का श्राद्ध करना हो उस के पहले दिन विद्वान ब्राह्मण को बड़े आदर भाव से भोजन का निमंत्रण देना चाहिए तथा मध्यान्हकाल में बढ़िया एवं मीठा भोजन खिलाकर ब्राह्मण को दक्षिणा में फल आदि देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। इस दिन पितर गायत्री मंत्र और पितर स्तोत्र का पाठ दक्षिणा मुखी होकर करना चाहिए। इस दिन कौवे, गाय और कुत्ते को ग्रास अवश्य डालें क्योंकि इनके बिना श्राद्ध अधूरा ही रहता है। चींटियों को भी आटा-चावल,अन्न आदि डालना चाहिए। 
 
श्राद्ध में क्या न करें
इन दिनों में शास्त्रानुसार- मसूर की दाल, मटर, राजमांह, कुलथी, मदार की दाल, धतूरा एवं अलसी का प्रयोग वर्जित है। घर में तामसी भोजन न बनाएं तथा किसी प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन न करें। श्राद्ध पक्ष में दिन में सोना, शरीर पर तेल, साबुन और इत्र आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए। 

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