श्राद्धों में बेटी को खिलाएं ये भोजन: दरिद्रता होगी भस्म, निश्चित बनेंगे धनवान

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Thursday, September 15, 2016-3:36 PM
शास्त्रों में वर्णन आता है कि महालक्ष्मी के आठ स्वरुप हैं। लक्ष्मी जी के ये स्वरूप जीवन की आधारशिला हैं। इन आठों स्वरूपों में लक्ष्मी जी जीवन के आठ अलग-अलग वर्गों से जुड़ी हुई हैं। इन आठ लक्ष्मी की साधना करने से मानव जीवन सफल हो जाता है। अष्ट लक्ष्मी साधना का उद्देश जीवन में धन के अभाव को मिटा देना है। घर की बेटी के रूप में महालक्ष्मी हर व्यक्ति के अंग-संग रहती हैं। 
कल 16 सितंबर शुक्रवार से श्राद्ध पक्ष का आरंभ हो रहा है, साथ में देवी लक्ष्मी का प्रिय दिन शुक्रवार है। वैसे तो श्राद्ध पक्ष में मात्र पितरों का पूजन करने का विधान है परंतु भाद्रपद शुक्ल अष्टमी अर्थात राधा अष्टमी से लेकर पितर पक्ष की अष्टमी तक इन 16 दिनों में महालक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है और इन्हीं दिनों में महालक्ष्मी व्रत भी संपूर्ण होता है। श्राद्ध पक्ष में विशेष रूप से लक्ष्मी के गजलक्ष्मी स्वरूप का पूजन करने का विधान है। 
 
कल भाद्रपद पूर्णिमा का शुभ दिन होने के साथ-साथ सूर्यदेव अपनी राशि परिवर्तन कर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे अर्थात कल कन्या संक्रांति भी है। इस दौरान महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त करने हेतु अपने घर की अविवाहित पुत्री अथवा विवाहित बेटी को विशेष भोजन करवाकर या विवाहित बेटी के ससुराल पक्ष में विशिष्ट भोजन सामग्री भिजवा कर आप भी लक्ष्मी कृपा प्राप्त कर सकते हैं। 
 
* सोमवार को चावल की खीर खिलाएं। 
 
* मंगलवार के दिन इमरती भेंट करें।
 
* बुधवार को साबुदाने की खीर खिलाएं।
 
* गुरूवार के दिन बेसन का हलवा खिलाएं। 
 
* शुक्रवार मखाने की खीर खिलाएं। 
 
* शनिवार के दिन बादाम का हलवा खिलाएं।
 
* रविवार के दिन शहद भेंट करें। 
 
अगर घर में बेटी अथवा कन्या न हो तो किसी सुहागन महिला को कलश, जरकन, इत्र, आटा, शक्कर और घी भेंट स्वरूप दे सकते हैं। अगर महिला ब्राह्मणी हो तो ज्यादा अच्छा है। इसके साथ-साथ किसी कुंवारी कन्या को नारियल, मिश्री और मखाने भेंट कर आप महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं। 
 
विशेष: किसी भी श्राद्ध वाले दिन सिंघाड़े के आटे से बने मीठे-नमकीन पकवान खिलाएं जा सकते हैं। जो सामग्री सुहागन और कुंवारी कन्या को देने के लिए कहा गया है, वह आप अपनी बेटी को भी दे सकते हैं। 
 
महालक्ष्मी स्वरूप अपने घर की लक्ष्मी को ये भोज्य पदार्थ और भेंट श्राद्ध के खास दिन देने से धन की कभी कमी नहीं होती। व्यक्ति कर्जे के चक्रव्यूह से बहार आ जाता है। आयु में वृद्धि होती है। बुद्धि कुशाग्र होती है। परिवार में खुशहाली आती है। समाज में सम्मान प्राप्त होता है। प्रणय और भोग का सुख मिलता है। व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा होता है और जीवन में वैभव आता है।
 
आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com 
Edited by:Aacharya Kamal Nandlal

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