सरकारी बैंकों का 7.90 लाख करोड कर्ज में डूबा

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Friday, January 05, 2018-4:50 PM

नई दिल्लीः कारर्पोरेट घरानों को दिए गए बडे रिण की वसूली नहीं होने से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको का 7.90 लाख करोड़ से ज्यादा पैसा गैर निष्पादित परिसंपत्तियों में तब्दील हो गया है। वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय रिवर्ज बैंक के आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2017 तक सार्वजनिक बैंको की कुल गैर निष्पादित परिसंपत्तियां 790488 करोड़ रूपए पर पहुंच गई। 

शुक्ल ने कहा कि 31 मार्च 2015 में बैंको का कुल एनपीए 323264 करोड़ रूपए था जो 31 मार्च 2017 को बढ़कर 790488करोड़ रूपए हो गया। इस अवधि में सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक का सबसे ज्यादा 77538 करेाड़ रूपया कर्ज में डूबा। इसके साथ ही 100 करोड़ रूपए से अधिक का कर्ज लेने वाले चूककर्ताओं की संख्या भी बैंक में सबसे ज्यादा 265 रही। रिजर्व बैंक की ओर से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के कुल 21 बैंको से 100 करोड़ रूपए से ज्यादा रिण लेने वाले चूककर्ताओं की संख्या 1463 रही।

बैकों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए सरकार की ओर से प्रत्येक बैंक के लिए कुछ दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। जिसके अनुसार प्रत्येक बैंक से अपनी रिण वसूली नीति बनाने के लिए कहा गया है। जिसके तहत बकाया राशि वसूलनेके तरीकों,कर्ज माफी देने से पूर्व निर्णय स्तर, उच्च प्राधिकरणों को सूचित करने और बट्टे खाते में डाली जाने वाली राशि के मामलों की निगरानी जैसी प्रक्रियाएं शामिल किया जाना तय किया गया है। 
 

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