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कल देवी कात्यायिनी पर चढ़ाए ये चीज, विवाह बाधाएं होंगी दूर

  • कल देवी कात्यायिनी पर चढ़ाए ये चीज, विवाह बाधाएं होंगी दूर
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Monday, January 22, 2018-1:21 PM

मंगलवार दि॰ 23.01.18 को माघ शुक्ल षष्टि को गुप्त नवरात्र के अंतर्गत छठी दुर्गा कात्यायिनी का पूजन किया जाएगा। पार्वती स्वरूपा देवी कात्यायिनी महर्षि कत के गोत्र में उत्पन्न हुई। महर्षि कात्यायन की पुत्री रूप में इनका नाम कात्यायिनी पड़ा। शास्त्रनुसार बृहस्पति ग्रह व उत्तरपूर्व दिशा की स्वामिनी देवी कात्यायिनी का स्वरूप सोने के समान चमकीला है। चतुर्भुजी देवी ने ऊपर वाले बाएं हाथ में कमल, नीचे वाले बाएं हाथ में तलवार धारण की हुई है। इनका ऊपर वाला दायां हाथ अभय मुद्रा व नीचे वाला दायां हाथ वरदमुद्रा में है। पीतवस्त्र धारिणी स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित देवी सिंह पर सवार हैं। ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं, ब्रज गोपियों ने कृष्ण को पतिरूप में पाने हेतु कालिन्दी-यमुना तट पर इन्हीं की पूजा की थी। ज्योतिष शास्त्रनुसार देवी कात्यायिनी का संबंध व्यक्ति की कुण्डली के नवम व द्वादश भाव से अतः ये व्यक्ति के धर्म, भाग्य, इष्ट, हानी, व्यय, व मोक्ष पर सत्ता रखती है। इन्हें पीले फूलों, बेसन का हलवा व हल्दी का उबटन अति प्रिय है। इनकी साधना से दुर्भाग्य से छुटकारा मिलता है, विवाह बाधा दूर होती है व शत्रुता का अंत होता हैं।

 

पूजन विधि: घर की पूर्व दिशा में पूर्व मुखी होकर पीले वस्त्र पर देवी कात्यायिनी का चित्र स्थापित कर दशोंपचार पूजन करें। सरसों के तेल का दीपक करें, गुगगल से धूप करें, सूरजमुखी के फूल चढ़ाएं, केसर से तिलक करें, तथा गुड़ चने का भोग लगाएं व चंदन की माला से 108 बार इस विशिष्ट मंत्र जपें। पूजन के गुड़-चना गाय को खिला दें।

पूजन मुहूर्त: दिन 11:30 से दिन 12:30 तक। 


पूजन मंत्र: ॐ कात्यायन्यै देव्यै: नमः॥

 

उपाय
दुर्भाग्य से छुटकारे हेतु पीली सरसों सिर से वारकर कात्यायिनी के निमित कर्पूर से जलाएं।


विवाह बाधा दूर करने हेतु देवी कात्यायिनी पर हल्दी का उबटन चढ़ाएं।


शत्रुता के अंत हेतु देवी कात्यायिनी पर चढ़ा बेसन का हलवा ब्राह्मणी को खिलाएं।

आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com

 

Edited by:Aacharya Kamal Nandlal
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