आज है प्रतिपदा (एकम) का श्राद्ध: शास्त्रों के अनुसार करें पितरों को प्रसन्न

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Saturday, September 17, 2016-11:05 AM

शास्त्रों में ऐसा वर्णित है की श्राद्ध करने वाले की दीर्धायु प्राप्त होती है। पितृ कृपा स्वरुप श्राद्ध कर्ता को श्रेष्ठ संतान देते हैं। घर-परिवार में धन-धान्य में वृद्धि होती है। शारीरिक बल, पौरुष और सुंदरता में वृद्धि होती है तथा सांसारिक जीवन में सुख-समृद्धि हासिल होती है। आधुनिकता की दौड़ में युवा पीड़ी के अधिकतर लोगों को यह ज्ञान नहीं है कि श्राद्ध किस तरह से किया जाता है तथा युवा वर्ग श्राद्ध से जुडी शास्त्रीय विधि से भी अनिभिज्ञ हैं। तो हम अपने पाठकों को यह बता दें के पितृत्व की संतुष्टि और अपने कल्याण हेतु श्राद्ध परम आवश्यक माना गया है। 

सूक्ष्म जीवात्मा पूजन: शास्त्र स्कंदपुराण के अनुसार पितृ और देव योनि एक समान होती हैं। देवगण और पितृगण दोनों ही दूर से कही हुई बातें सुन लेते हैं। दूर की पूजा भी ग्रहण कर लेते हैं और दूर से की गई स्तुति से भी संतुष्ट हो जाते हैं। देवगण और पितृगण दोनों ही गंध तथा रस तर्पण से तृप्त होते हैं। जिस प्रकार मनुष्यों का आहार अन्न है, उसी भांति पितृगण का आहार अन्न का सार तत्व है। जैसे गोशाला में गाय का बछड़ा अपनी बिछड़ी हुई मां को किसी न किसी भांति ढूंढ़ ही लेता है, उसी भांति मंत्रोच्चारण द्वारा दी हुई आहुतियों का द्रव्य को पितृगण किसी न किसी प्रकार प्राप्त कर ही लेते हैं।

कैसे करें प्रतिप्रदा श्राद्ध कर्म: श्राद्धकर्ता को चाहिए की वो पितृगण के निमित सरसों के तेल का दीपक जलाएं। लाल-पीले मिश्रित फूल अर्पित करें। सुंगधित धूप अर्पित करें। लाल चंदन अर्पित करें। पूड़ीयों के साथ बेसन के हलवे का भोग लगाएं। उसके बाद ब्राह्मणों के पांव धोकर उनका सत्कार कर उन्हें पूड़ीयों, बेसन के हलवे तथा सात्विक सब्जी का भोजन करवाएं तथा वस्त्र पात्र और उचित दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लें।

आचार्य कमल नंदलाल

ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com

Edited by:Aacharya Kamal Nandlal

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