लक्ष्मी पूजा से पहले ध्यान रखें ये बातें, दीपावली आने तक धन बरसने का योग बनेगा

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Saturday, October 22, 2016-3:44 PM

सनातन धर्म में दीपावली को अत्यधिक महत्व दिया जाता है। न केवल हिंदू धर्म में बल्कि अन्य धर्मों में भी अपनी-अपनी मान्यताओं के अनुसार इसे धूमधाम से मनाए जाने का विधान है। 30 अक्टूबर को दीपावली का महामुहूर्त आ रहा है। जिसकी तैयारियां दशहरे के उपरांत आरंभ हो जाती हैं। लक्ष्मी पूजा से पहले ध्यान रखें ये बातें, दीपावली आने तक धन बरसने का योग बनेगा।


* जो व्यक्ति निष्क्रिय रहते हैं ऊंघना अथवा सोना उनकी प्रवृति में होता है, ऐसे लोग कभी देवी लक्ष्मी से आशीर्वाद प्राप्त नहीं कर सकते। 


* मनुष्य की सबसे बड़ी ताकत है उसका आत्मविश्वास और जिसके पास इस ताकत का अभाव है सही मायनों में दुनिया का सबसे दुर्बल व्यक्ति भी वही है। अपने कर्मों से अपना भाग्य बनाएं। लग्रशील और कर्मयोगी बनें। असफल होने पर भाग्य को कोसें नहीं जरूरी है कि अपनी ताकत व क्षमताओं पर विश्वास रखें। 


* ज्ञानवर्धक पुस्तकों को अपना साथी बनाएं। अच्छे लोगों से मेल-जोल बढ़ाएं। कामयाब लोगों से मिलकर उनसे प्रेरणा लें। माता-पिता एवं अध्यापकों के बताए मार्ग पर चलें। 


* जो व्यक्ति अपनी पिछली गलतियों से सबक लेते हुए आगे बढ़ता है वही सच्ची सफलता हासिल करता है। इसके अलावा सोच-समझ कर बोलें हमेशा सकारात्मक कहें व सोचें। यदि हम अपने सकारात्मक विचारों के साथ-साथ ईश्वर पर भी पूर्ण विश्वास करें तो हमें किसी भी कार्य में सफलता मिलनी तय है। सकारात्मक सोच में एक उपचारात्मक शक्ति है। यह आशा और उत्साह की जनक है। जीवन एक परीक्षा है और सकारात्मक सोच के द्वारा ही उसमें सफलता प्राप्त होती है।


गुरु रविन्द्र नाथ टैगोर ने कहा है कि, ‘‘जहां आप कुछ सीख सकते हैं , वहीं झुक जाना चाहिए और जहां शांति मिले वहीं रुक जाना चाहिए।’’


* अपने ऊपर कभी भी अहंकार न करें। विनम्रता, सफल जीवन का सबसे बड़ा गुण है। सबसे बढ़ कर स्वाभिमानी बनें। ऐसा कहा जाता है कि जो लोग सिर्फ सपने देखना जानते हैं उनको रातें छोटी लगती हैं और जो सपनों को साकार करना जानते हैं उन्हें दिन छोटे लगते हैं।


* श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार भगवान की शिक्षा है कि स्वधर्म पालन के लिए सैन्य अनुशासन के सदृश पूर्णतया कृष्णभावनाभावित होना आवश्यक है। ऐसे आदेश से कुछ कठिनाई उपस्थित हो सकती है, फिर भी कृष्ण के आश्रित होकर स्वधर्म का पालन करना ही चाहिए, क्योंकि यह जीव की स्वाभाविक स्थिति है। जीव भगवान् के सहयोग के बिना सुखी नहीं हो सकता क्योंकि जीव की नित्य स्वाभाविक स्थिति ऐसे है कि भगवान् की इच्छाओं के अधीन रहा जाए।    


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