पांचवा नवरात्र: बुद्धिहीन को मिलेगी बुद्धि, देवी स्कन्दमाता देंगी सिद्धि

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Thursday, October 06, 2016-11:30 AM

श्लोक: या देवी सर्वभू‍तेषु स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
        नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


अवतार वर्णन: शास्त्रों के अनुसार माता दुर्गा के पांचवे स्वरूप में नवरात्र की पंचमी तिथि पर मां स्कन्दमाता की आराधना का विधान है, आदिशक्ति दुर्गा के स्कन्दमाता स्वरूप की कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है। इनकी उपासना से भक्त की सर्व इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं। भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है । शब्द स्कन्दमाता का संधिविच्छेद कुछ इस प्रकार है की स्कन्द का अर्थ है कुमार कार्तिकेय अर्थात माता पार्वती और भगवान शंकर के जेष्ठ पुत्र कार्तिकेय इन्हें दक्षिण भारत में भगवान मुर्गन के नाम से भी जाना जाता है तथा माता कर अर्थ अहि मां अर्थात जो भगवान स्कन्द कुमार की माता हैं वही मां स्कन्दमाता है। शास्त्रों में ऐसा वर्णन है की इनके विग्रह में भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं अतः ये ममता की मूर्ति हैं। 


स्वरुप वर्णन: देवी स्कन्दमाता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं तथा इनकी मनोहर छवि पूरे ब्रह्मांड में प्रकाशमान होती है। शास्त्रों के अनुसार देवी स्कन्दमाता ने अपनी दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से बाल स्वरुप में भगवान कार्तिकेय को गोद में लिया हुआ है। दाईं तरफ की नीचे वाली भुजा में इन्होंने कमल पुष्प का वरण किया हुआ है। बाईं तरफ ऊपर वाली भुजा से इन्होने जगत को तारने के लिए वरदमुद्रा बना रखी हैं और नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है। देवी स्कन्दमाता का वर्ण पूर्णत: शुभ्र है। जिस प्रकार सारे रंग मिलकर शुभ्र (मिश्रित) रंग बनता है, इसी तरह इनका ध्यान जीवन में हर प्रकार की परिस्थितियों को स्वीकार करके अपने भीतर आत्मबल का तेज उत्पन्न करने की प्रेरणा देता है। ये कमल के पुष्प पर विराजमान हैं, इसी कारण इन्हें “पद्मासना देवी” और “विद्यावाहिनी दुर्गा” कहकर भी संबोधित किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार इनकी सवारी सिंह के रूप में वर्णित है।


साधना वर्णन: नवरात्र की पंचमी तिथि को देवी स्कन्दमाता के स्वरूप की ही उपासना की जाती है। देवी स्कन्दमाता विद्वानों और सेवकों को पैदा करने वाली शक्ति हैं अर्थात चेतना का निर्माण करने वाली देवी हैं, इन्हें दुर्गा सप्तसती शास्त्र में “चेतान्सि” कहकर संबोधित किया गया है । नवरात्रि-पूजन के पांचवें दिन देवी स्कन्दमाता के पूजन का शास्त्रों में पुष्कल महत्व बताया गया है।  स्कंदमाता की उपासना से बालरूप स्कंद भगवान की उपासना भी स्वमेव हो जाती है। यह विशेषता केवल इन्हीं को प्राप्त है, अतः साधक को स्कंदमाता की उपासना की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए। इनकी पूजा का सबसे अच्छा समय है दोपहर से मध्यान्ह पूर्व सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच । इनकी पूजा सफेद कनेर के फूलों से करनी चाहिए । इन्हें मूंग से बने मिष्ठान का भोग लगाना चाहिए तथा श्रृंगार में इन्हें हरे रंग की चूडियां अर्पित करना शुभ रहता है । इनकी उपासना से मंदबुद्धि व्यक्ति को बुद्धि और चेतना प्राप्त होती है पारिवारिक सुख-शांति मिलती है, इनकी कृपा से ही रोगियों को रोगों से मुक्ति मिलती है तथा समस्त व्याधियों का अंत होता है। इनका ध्यान इस प्रकार है- 


सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रि तकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी ।। 


योगिक दृष्टिकोण: कुण्डलिनी जागरण के उद्देश्य से जो साधक दुर्गा उपासना करते हैं उनके लिए नवरात्र पंचमी विशिष्ट साधना का दिन होता है । देवी स्कन्दमाता साधना के लिए साधक अपने मन को “विशुद्धि' चक्र” में स्थित करते हैं,  इस चक्र का भेदन करने के लिए देवी स्कन्दमाता की विधिवत पूजा करने का विधान है । पूजा के लिए कम्बल का आसन श्रेष्ठ रहता है । 


ज्योतिष दृष्टिकोण: मां स्कन्दमाता की साधना का संबंध बुद्ध ग्रह से है । कालपुरूष सिद्धांत के अनुसार कुण्डली में बुद्ध ग्रह का संबंध तीसरे और छठे घर से होता है अतः मां स्कन्दमाता की साधना का संबंध व्यक्ति की सेहत, बुद्धिमत्ता, चेतना, तंत्रिका-तंत्र और रोगमुक्ति से है । जिन व्यक्तियों कि कुण्डली में बुद्ध ग्रह नीच अथवा मंगल से पीड़ित हो रहा है अथवा मीन राशि में आकर नीच एवं पीड़ित है उन्हें सर्वश्रेष्ठ फल देती है मां स्कन्दमाता की साधना । मां स्कन्दमाता कि साधना से व्यक्ति के असाध्य रोगों का निवारण होता है । गृहक्लेश से मुक्ति मिलती है। जिन व्यक्ति की आजीविका का संबंध प्रशासन मैनेजमैंट, कमर्शियल सर्विसेज, वाणिज्य विभाग, बैंकिंग क्षेत्र अथवा व्यापार (बिजनैस) से हो उन्हें सर्वश्रेष्ठ फल देती है मां स्कन्दमाता की साधना।


विशेष उपाय: बुद्धिबल वृद्धि के लिए देवी स्कन्दमाता पर 6 इलायची चढ़ाकर सेवन करें। सामाग्री चढ़ाते समय "ब्रीं स्कन्दजनन्यै नमः" का जाप करें। उपाय मध्यान शुभमहूर्त में करें। निश्चित ही बुद्धिबल में वृद्धि होगी।


आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com

Edited by:Aacharya Kamal Nandlal

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