20 सितंबर उपाय: पापों से पीछा न छुड़ाने वाले प्रेत करते हैं घर वालों को तंग, बचें उनके वार से

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Monday, September 19, 2016-3:27 PM

अक्सर हमारे सामने ऐसी घटनाएं आती रहती हैं जिनमें घर के पितृ प्रेत योनि को प्राप्त होकर पूरे परिवार को प्रेत बाधा में जकड़ लेते हैं। सनातन धर्म में प्रेत बाधा से मुक्ति हेतु अनेक उपाय बताए गए हैं। चरक संहिता में प्रेत बाधा का विस्तार पूर्वक वर्णन मिलता हैं। ज्योतिषशास्त्र जैसे कि प्रश्नमार्ग, वृहत्पराषर, होरा सार, फलदीपिका, मानसागरी आदि में ज्योतिषीय योगो का वर्णन किया गया है जो की प्रेत बाधा, पितृ दोष अथवा पितृ ऋण को कुंडली में इंकित करते हैं। इसी के साथ ही अथर्ववेद में प्रेत बाधा के निवारण हेतु अनेक उपायों का वर्णन मिलता है।

शास्त्रनुसार श्मशान, कब्रिस्तान, पुराने बंद पड़े घर, तालाब के किनारे या बड़ के पेड़ पर मृत आत्माओं का निवास होता है। मृत्यु के बाद जो लोग अपने जीवन काल में तामसिक प्रवृति के रहे हैं अथवा जिनकी इच्छाएं पूर्ण नहीं होती है वो आत्माएं भटकती रहती हैं। यही आत्माएं हमारे पूर्वजों के रूप में पितृ बाधा, पितृ दोष और प्रेत बाधा का निर्माण करती हैं।

शास्त्रानुसार कुछ आत्माएं मृत्यु उपरांत अघम में प्रवेश कर जाती हैं और ये प्रेत बनकर अपना पुराना बदला लेती हैं तो कुछ घर वालों को नुकसान पहुंचाने में ही लगी रहती हैं, बनते हुए काम बिगाड़ना, तबीयत खराब करना आदि इनके स्वभाव में शामिल होता है।

प्रेत बाधाओं को दूर करने के लिए मंगला चौथ का दिन सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है। शास्त्रनुसार मंगला चौथ पर जाप मंत्र जाप, दान का सूर्य ग्रहण के बराबर फल मिलता है अर्थात दस लाख गुणा। इस दिन पितृ दोष से संबन्धित कर्म जैसे की प्रेत बाधा निवारण का सर्वाधिक फल मिलता है। मत्स्य पुराण, नारद पुराण व गणेश पुराण जैसे शास्त्रों में मंगला चौथ की बड़ी महिमा कही गई है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार किसी भी माह के मंगलवार पर पड़ने वाली चतुर्थी तिथि को मंगला चौथ कहते हैं। मंगला चौथ के दिन गज छाया के समय पितृ के निमित निश्चित कर्म करने से प्रेत बाधा से मुक्ति मिलती है।
मंगला चौथ के विशिष्ट उपाय
* प्राण प्रतिष्ठित 11 मुखी रुद्राक्ष काले धागे में पिरोकर गले में धारण करें।

* सरसों के तेल का दिया जलाकर "हं रक्ष रक्ष हुं फट" का जाप करते हुए काजल बना लें व इस काजल का प्रयोग करें।

* अशोक वृक्ष के सात पत्ते मंदिर में रखकर पूजा करें। सूखने पर नए पत्ते रखें व पुराने पत्ते पीपल के पेड़ के नीचे रख दें।

* धतूरे का पौधा जड़सहित उखाड़ कर उसे धरती में ऐसा दबाएं कि जड़ वाला भाग ऊपर रहे व पूरा पौधा धरती में समा जाएं।

* घर में रात्रि को भोजन पश्चात सोने से पूर्व चांदी की कटोरी में देवस्थान या किसी अन्य पवित्र स्थल पर कपूर तथा लौंग जला दें।

* विधि-विधान से लाल आसन पर बैठकर दक्षिणमुखी हनुमान जी की षोडशुपचार पूजा करें। इसके पश्चात लाल मूंगे की माला से 11 माल इस मंत्र का जाप, दशांश का होम, होम के दशांश का तर्पण और तर्पण के दशांश का मार्जन करें।

मंत्र: ऐं ह्रीं श्रीं ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं नमो भगवते महाबल पराक्रमाय भूत-प्रेत पिशाच-शाकिनी-डाकिनी-यक्षणी-पूतना-मारी-महामारी, यक्ष राक्षस भैरव बेताल ग्रह राक्षसादिकम्‌ क्षणेन हन हन भंजय भंजय मारय मारय शिक्षय शिक्षय महामारेश्वर रुद्रावतार हुं फट् स्वाहा।
आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com

Edited by:Aacharya Kamal Nandlal

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