नोटबंदी को लेकर PM मोदी से हुईं ये 5 बड़ी गलतियां!

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Saturday, November 19, 2016-2:08 PM

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 500 और 1000 के नोट बंद होने की घोषणा के बाद पूरे देश में अफरा-तफरा मची हुई है। नोटबंदी के फैसले के बाद बने हालात अब भी सुधरते नहीं दिख रहे हैं। देश के हर हिस्से से एटीएम मशीनों और बैंकों के सामने लंबी-लंबी कतारें लगने की खबरें आ रही हैं। आइए देखते हैं कि पीएम मोदी ने नोटबंदी को लागू करने में कौन सी पांच बड़ी गलतियां कीं। 


मोदी की घोषणा से जनता में गया गलत संदेश
पीएम मोदी ने जब नोटबंदी की घोषणा की तो उन्होंने जोर देकर कहा कि रात 12 बजे से 500 और 1000 के नोट कागज के टुकड़े रह जाएंगे। पीएम मोदी ने अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में ये साफ किया कि पुराने नोटों को 30 दिसंबर तक बैंकों में बदला जा सकेगा लेकिन उनका शुरुआती स्वर ऐसा थे जिससे कई लोगों खासकर अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे गरीब तबके को लगा कि पुराने नोट उस दिन के बाद किसी काम के नहीं रहेंगे। इसकी वजह से एक तरह से बदहवासी का आलम हो गया। 

अस्पतालों और दवा की दुकानों को कड़ा संदेश न देना
नोटबंदी के बाद सबसे ज्यादा स्थिति का सामना ऐसे लोगों को करना पड़ा जो अस्पताल में भर्ती थे या जिन्हें इलाज कराना था। ऐसी कई खबरें आईं कि अस्पतालों ने पीएम मोदी की घोषणा के तुरंत बाद पुराने नोट लेना बंद कर दिया। इस वजह से एक बड़ी आबादी को गंभीर संकट का सामना करना पड़ा। शुरुआती घोषणा में दवा की दुकानों पर 500-1000 के नोट चलाने की छूट नहीं दी गई थी। इसकी वजह से बीमार लोगों को निजी दवा की दुकानों पर दवाएं लेने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ा।

जनता की दिक्कत के बारे में नहीं सोचा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार नोटबंदी की तैयारी छह महीने से कर रही थी लेकिन इसके बाद जिस तरह के हालात पैदा हुए उससे ऐसा कत्तई नहीं लगता। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2016 तक भारत में 16.42 लाख करोड़ रुपए मूल्य के नोट बाजार में थे जिसमें से करीब 14.18 लाख करोड़ रुपए 500 और 1000 के नोटों के रूप में थे।  आरबीआई 100 और 50 रुपए के नोटों की अधिक मात्रा पहले से बाजार में उतार सकता था जिससे जनता पर तुरंत नकद की कमी का इतना ज्यादा दबाव नहीं पड़ता। 

एटीएम में नए नोटों की उपलब्धता सुनिश्चित न करना
वित्त मंत्रालय की योजना के अनुसार 10 नवंबर से सभी एटीएम से हर कार्ड से दो हजार रुपए निकाल जा सकेंगे। जब 10 नवंबर को सारे एटीएम खुले तो उनके सामने भी बैंकों ही की तरह लम्बी कतार लग गई, लेकिन उनका हाल भी बैंकों जैसा ही हुआ। देश के सारे एटीएम में केवल 100-100 के नोट उपलब्ध थे। नतीजा ये हुआ कि सभी एटीएम कुछ ही घंटों में खाली हो गए और लोगों की हताशा बढ़ गई।


पहले उतारा 2000 का नोट बाद में 500 का
बैंकों से 10 नवंबर को जनता को 2000 के नए नोट मिलने शुरू हो गए। गिने-चुने जगहों पर 500 नोटों की उपलब्धता की खबर आई। जिन लोगों को 2000 के नए नोट मिले भी उनकी मुसीबत कम नहीं हुई क्योंकि बाजार में बहुत कम ही दुकानदार 2000 के नोट के बदले 50-100-200 रुपए का सामान देने को तैयार हो रहे थे। जिन लोगों के पास 100 रुपए के नोट थे वो हालात को देखते हुए उसे खर्च करने में बहुत ज्यादा किफायत बरत रहे थे।


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