दो करोड़ से अधिक लोग ‘साक्षरता टेस्ट’ में पास, 80 लाख फेल

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Wednesday, October 16, 2013-2:38 PM

नई दिल्ली: ‘साक्षर भारत’ अभियान से देश में पिछले ढाई वर्ष में दो करोड से अधिक लोग परीक्षा में पास होकर ‘प्रौढ साक्षर’ बन चुके है जबकि करीब 80 लाख फेल हो गए है। वर्ष 2009 में अन्तरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर ‘साक्षर भारत’ अभियान की शुरूआत हुई थी। यह अभियान देश के 25 राज्यों तथा एक केन्द्र शासित क्षेत्र के उन 372 जिलो में शुरू हुआ था जहां महिला साक्षरता कम थी।

इस अभियान के तहत करीब डेढ लाख प्रौढ शिक्षा केंद्र खोले गए थे और करीब दो लाख 30 हजार प्रेरको की मदद से साक्षर बने करीब 3 करोड लोग साक्षरता आंकलन परीक्षा में बैठे थे। इनमें दो करोड 13 लाख लोग उत्तीर्ण हुए। इन लोगों को बकायदा साक्षरता का प्रमाण पत्र भी दिया जा चुका है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ताजा आधिकरिक रिपोर्ट के अनुसार इस अभियान से दलित एवं आदिवासियों की साक्षरता की स्थिति में सुधार हुआ।

करीब 22.82 प्रतिशत दलित एवं करीब 12.76 प्रतिशत आदिवासी साक्षर हुए। साक्षरता टेस्ट में करीब 72 प्रतिशत महिलाएं पास हुई। सरकार इस अभियान पर 2009 से 2013 तक 1562 करोड 48 लाख रुपए खर्च कर चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1991 से 2011 तक कुल 20 करोड 27 लाख 50 हजार लोग साक्षर बनाए गए जिनमें 10 करोड 46 लाख 40 हजार महिलाओं को साक्षर बनाया जा चुका है। इस तरह पहले जहां 100 में 71 महिलाएं साक्षर होती थी, अब उनकी संख्या बढकर 80 हो गई है यानी महिला साक्षरता में 10.87 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।


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