जाने माने नाटककार प्रो.जी.पी. देशपांडे का निधन

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Thursday, October 17, 2013-12:10 PM

नर्इ दिल्लीः जाने माने बुद्धिजीवी एवं मराठी के चर्चित नाटककार प्रो. जी.पी. देशपांडे का कल रात पुणे में  लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 75 वर्ष के थे। उनके परिवार में उनके रंगकर्मी पुत्र सुथनवा देशपांडे और उनकी बेटी अश्विनी हैं। उनकी पत्नी का चार साल पहले ही निधन हो चुका था।

महाराष्ट्र के नासिक में 1938 में जन्में प्रो. गोविंद पुरूषोत्तम देशपांडे जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विभाग में प्रोफेसर थे1 वह 2004 में सेवानिवृत्त होने के बाद पुणे में रह रहे थे। उध्वस्त धर्मशाला, रास्ते,अंधार यात्रा, और सत्यशोधक, जैसे बहुचर्चित नाटक लिखने वाले देशपांडे की गिनती देश के चोटी के
नाटककारों में होती थी।

 उनके इन नाटकों का कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद हो चुका था और कई शहरों में विभिन्न भाषाओं में उनके मंचन भी हुए थे। संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित देशपांडे को 15 जुलाई को मस्तिष्क स्राव, ब्रेन हेमरेज होने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया था जहां वह तीन महीने से कोमा में थे। गत शनिवार को उन्हें अपने आवास पर लाया गया जहां कल रात सवा आठ बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। देशपांडे का अंतिम संस्कार आज 11 बजे किया जायेगा।


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