रहस्यमय खजाना: ख्वाब या हकीकत

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Saturday, October 19, 2013-9:57 AM

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के डौंडिया खेड़ा गांव में साधु शोभन सरकार के सपने के आधार पर राजा राव रामबख्श सिंह के किले में 1000 टन सोने के खजाने की तलाश में खुदाई का काम पुरातत्व विभाग ने शुरू तो कर दिया है लेकिन संशय, आशंकाओं और अटकलों का माहौल चरम पर है।  जैसे-जैसे खुदाई का काम पूरा होने की ओर बढ़ेगा रहस्य और रोमांच का यह आलम नए नए रंग लेता जाएगा। कई तरह के अफवाहों और तिलिस्मी कहानियों के बीच महत्वपूर्ण यह है कि सरकार ने खुदाई का फैसला एक साधु के सपने के आधार पर लिया है, लेकिन यह आधी सच्चाई है, सच तो यह है कि  खुदाई का फैसला लेने के पीछे केवल साधु शोभन सरकार का सपना नहीं बल्कि भू-गर्भ सर्वेक्षण की 13 पेज की वह रिपोर्ट है जिसमें राजा राव रामबख्श सिंह के किले को पुरातत्व के हिसाब से महत्वपूर्ण बताया गया है। चर्चा यह भी है कि खुदाई के फैसले में सरकार के केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत पत्नी समेत साधु शोभन सरकार से मिल कर भी आ चुके हंै जिसके बाद यह फैसला लिया गया है। हालांकि इस क्षेत्र के आॢथक इतिहास क ो देखते हुए खजाने की हकीकत, हकीकत कम अफसाना ज्यादा लगती है ।

साधु का सपना
संत शोभन सरकार ने बक्सर से एक किलोमीटर दूर आश्रम में 3 माह पूर्व स्वप्न देखा था जिसमें 1857 की क्रांति में अंग्रेजी हुकूमत की चूल्हें हिलाने वाले डौंडिया खेड़ा के राजा राव रामबख्श सिंह के किले में खजाना दबे होने की बात कही गई थी। हालांकि 3 माह पूर्व देखे इस सपने के आधार पर अचानक  खुदाई का फैसला लेने के पीछे पुरातत्व विभाग की अपनी दलील है।

पुरातत्व विभाग की दलील
पी.के.मिश्रा की अध्यक्षता में खुदाई के लिए गठित ए.एस.आई. की टीम का कहना है कि खुदाई का फैसला  29 सितम्बर को भू-गर्भ सर्वेक्षण की उस रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है जिसमें कहा गया है कि इस इलाके में सोना, चांदी और अन्य लौह धातु होने की संभावना के  संकेत है। पुरातत्व विभाग का यह भी कहना है कि अगर खजाने के जगह पर उसे पुरातात्विक महत्व का अन्य सामान भी मिलता है तो ये उनके लिए खजाने से कम नहीं होगा।

खुदाई की तकनीक
उन्नाव में राजा राव रामबख्श सिंह के किले पर भारतीय पुरातत्व विभाग की टीम ने मंगलवार से ही किले में साफ-सफाई का काम शुरू कर दिया। किले में कई जगह चिन्हित करके निशान लगाया गया है।

माना जा रहा है कि टीम यहीं खुदाई करेगी। ए.एस.आई. टीम ने खुदाई के लिए 3200 वर्ग मीटर के एरिया को मार्क किया है, लेकिन ए.एस.आई. के अधिकारियों ने इस काम के लिए जो औजार लाए हैं उस हिसाब से खजाना निक ालने में काफी समय लग सकता है। पुरातत्व विभाग ने खेती बाड़ी में इस्तेमाल होने वाली मशीन लाई है। यह पूछे जाने पर कि खुदाई के लिए हाईटैक मशीन का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है तो अधिकारियों ने कहा कि हाईटैक मशीन का इस्तेमाल ए.एस.आई. बड़ी एरिया मेें खुदाई के लिए करती है। यहां पर इसकी आवश्यकता नहीं है, लेकिन इससे पहले ए.एस.आई. ऐसे मौकों पर अर्थ मूवर मशीन का इस्तेमाल करती रही है। सेना की मदद से कुछ घंटों में खुदाई का काम निपटा लेने की मांग केंद्र सरकार ने पहले ही ठुकरा दी है। साधु शोभन सरकार ने भी मान लिया है कि खुदाई में महीनों का समय लगेगा इससे पहले उनकी मांग थी कि खुदाई एक 2 दिनों में निपटा लिया जाए। 

कई दावेदार भी आए सामने
अभी खजाने की खुदाई शुरू ही हुई है कि खजाने पर अपना दावा करने वाले कई दावेदार सामने आ गए है। इन दावेदारों में उत्तर प्रदेश सरकार, खजाने का सपना देखने वाले संत शोभन सरकार और इसके अलावा खुद को राजा का वंशज बताने वाले लोग भी खजाने में अपना हिस्सा लेने पहुंच गए हैं। इन लोगों का कहना है कि वे राजा राव बख्श की चौथी-5वीं पीढ़ी है, इसलिए अगर खजाना निकले तो उन्हें भी हिस्सा दिया जाए। यह वंशज अब जिले की पुरवा तहसील में रहती है।

जैसे ही इन्हें साधु की भविष्यवाणी के बाद शुरू हुई हलचल की खबर मिली, ये लोग यहां चले आए। खुद को राजा का वंशज बताने वाले अजय सिंह ने कहा, अगर कम सोना निकलता है तो किले का विकास किया जाए और ज्यादा निकले तो इलाके का विकास किया जाए साथ ही हम लोगों के लिए भी कुछ किया जाए।

कौन हैं साधु शोभन सरकार
भारत सरकार को सोने के सपने की सूचना देकर सनसनी मचाने वाले साधु शोभन सरकार के बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं। वह कौन हैं? कहां से आए हैं? आखिरकार वह लोगों के सामने क्यों नहीं आते? फोटो क्यों नहीं खिंचवाते? कैमरे के सामने आने से परहेज क्यों करते? ऐसे ही कुछ सवाल इस रहस्यमयी साधु के लिए कौतूहल का विषय बन चुके हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक शोभन सरकार के नाम से मशहूर इस संत का असली नाम कुछ और ही है।

 उनको स्वामी सतसंगा नन्द जी महाराज के नाम से जाना जाता है। वह बाल योगी के रूप में 15 साल की उम्र में बक्सर के आश्रम में अपने गुरु जी की शरण में आए थे। उस समय उनके गुरु जी ने उनको अपना शिष्य तो बना लिया, लेकिन कठोर तप करने के लिए बोला। उन्होंने अपने आप को सिद्ध करने के लिए करीब 8 साल तक कठोर तप की, इससे प्रसन्न होकर उनके गुरू ने उनको कानपुर के शिवली में बने शोभन मंदिर के आश्रम का  भार सौप दिया। वह वहीं रहने लगे। तभी से उनका शोभन सरकार पड़ा।

बक्सर के स्थानीय निवासियों की माने तो 70 वर्ष के हो चुके संत शोभन सरकार ने अपने लिए कभी कुछ नहीं किया। वह हमेशा देश और समाज के लिए काम करते रहे हैं। लोगों के मुताबिक, उन्होंने आजतक जितनी भविष्यवाणी की है, वह सच हुई है। विधानसभा चुनाव 2012 में उन्होंने कहा था कि इस बार अखिलेश यादव ही सी.एम. बनेंगे और यह सच हुआ था।


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