...और गुलजार हो गया रामबख्श का खंडहर किला!

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Saturday, October 19, 2013-6:30 PM

उन्नाव: इसे अंधविश्वास कहें या एक संत की भविष्यवाणी! उत्तर प्रदेश में उन्नाव जिले के डौंडिया खेड़ा स्टेट के राजा राव रामबख्श सिंह का खंडहर किला 155 साल बाद गुलजार हो गया है। इसके पीछे सरकार या समाज की कोई नेकनीयति नहीं बल्कि किले में सोने का ‘महाखजाना’ मिलने का लालच है। जहां दिन में चरवाहे तक जाने से कतराते रहे, वहां सरकारी अमला ही नहीं, सैकड़ों की तादाद में लोग सैलानी बनकर हाजिर हैं।

उन्नाव जिले के डौंडिया गांव के ग्रामीण बताते हैं कि फिरंगियों ने राजा राव रामबख्श सिंह को 28 दिसंबर, 1957 को फांसी देने के बाद इस किले को ध्वस्त कर दिया गया था। तब से आज तक सरकारी या गैर सरकारी संगठनों की निगाह इस धरोहर पर नहीं पड़ी। नतीजतन, एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का महल खंडहर में तब्दील हो गया।

किले में भगवान शिव और महज 200 मीटर की दूरी पर मां चन्द्रिका देवी का मन्दिर है। वीरान हो चुके इस किले की भयानकता के कारण आस्थावानों की बात तो छोड़ें, यहां दिन में चरवाहे भी जाने से कतराते रहे। अचानक संत शोभन सरकार को शहीद राजा की आत्मा ने सोने के ‘महाखजाने’ का कथित सपना दिया और वह निर्जन स्थान गुलजार हो गया।

खंडहर में बदल चुके किले में मेले जैसा नजारा है। जहां उन्नाव, कानपुर और लखनऊ के सैकड़ों लोग सैलानी बनकर हाजिर हैं, वहीं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों की टीम इस संभावित खजाने की रखवाली में भारी तादाद में पुलिस बल के साथ जमी हुई है। ऐसी स्थिति में दुकानदार भला पीछे कैसे रहते? लखनऊ से यहां आईं रंजना अवस्थी ने आईएएनएस को बताया कि मीडिया में सोने का महाखजाना होने का हो-हल्ला मचा हुआ है, सो वह भी इसे देखने चली आई हैं।

किले के मैदान में एक छोटी मेज और कुछ कुर्सियां लगा कर ‘हिमाचल होटल’ चलाने वाले जीतू का कहना है कि ‘‘सोना मिलता है या नहीं, यह तो संत शोभन सरकार और अधिकारी जानें, अपनी दुकान किले की खुदाई होने तक चलती रहेगी।’’ उसने बताया कि रोजाना डेढ़ हजार से दो हजार तक का चाय-नाश्ता बिक जाता है। गांव के बुजुर्ग ग्रामीण रामदुलारे बताते हैं कि इस किले में सोने की ‘खान’ होने के किस्से बहुत पुराने हैं, लेकिन किसी अनिष्ट के डर से कोई नजदीक नहीं गया। वह कहते हैं कि संत शोभन सरकार की भविष्यवाणी कभी गलत नहीं हुई और निश्चित तौर पर सोना मिलेगा।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारी डॉ. पी.के. मिश्रा कहते हैं कि जांच पड़ताल में किले के नीचे किसी धातु के दबे होने की पुष्टि हुई है। यह धातु क्या है? अभी बता पाना बड़ा मुश्किल होगा। अपने को शहीद राजा का वंशज बताने वाले राव चंडीवीर प्रताप सिंह तो खजाना मिलने से पहले ही उस पर हक जताने लगे हैं। उनका कहना है कि किले में दबा खजाना उनके पूर्वज का है, इसलिए किसी भी सरकार से पहले उस पर उनके वंशजों का हक बनता है।

उन्होंने यह भी कहा कि ‘‘खजाना मिलने के बाद यदि उन्हें न दिया गया तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।’’ समूचे देश में इतना बड़ा हो-हल्ला मचने के बाद संत शोभन सरकार अब तक मीडिया के सामने नहीं आए हैं। अलबत्ता उनके शिष्य ओमजी महराज ने मीडिया को बताया कि ‘‘किले के नीचे एक हजार टन सोने का खजाना है।’’ उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि खजाना नहीं मिला तो वह बड़ी-से-बड़ी सजा भुगतने को तैयार हैं। उन्होंने तो फतेहपुर के आदमपुर और कानपुर में भी खजाना होने का दावा किया है। इस किले से सोने का महाखजाना मिलना तो अभी भविष्य के गर्त में है, लेकिन सोने के लालच ने गुमनाम राजा और उसके किले को सुर्खियों में ला दिया है, साथ ही यह वीरान जगह अचानक गुलजार हो गया है।


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