हिंडाल्को कोल ब्लाक आवंटन: 'PM ने कुछ गलत नहीं किया'

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Saturday, October 19, 2013-7:47 PM

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए हिंडाल्को को कोयला ब्लाक के विवादास्पद आवंटन मुद्दे में किसी तरह की अपराधिता को आज यह कहते हुए खारिज किया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उसे मंजूरी मामले की पात्रता के आधार पर दी थी जो उनके समक्ष रखी गई थी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह स्पष्ट किया कि सिंह ‘सक्षम प्राधिकार’ थे, जिन्होंने वर्ष 2005 में कोयला मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने साथ ही यह भी रेखांकित किया कि हिंडाल्को सहित संयुक्त उद्यम को आवंटन सार्वजनिक उपक्रम नेवेली लिग्नाइट कार्पोरेशन की कीमत पर नहीं किया गया था।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने उस घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्यौरा जारी किया जिसके बाद सिंह ने एक अक्तूबर 2005 को इस आवंटन को मंजूरी दी थी और कहा कि ‘‘प्रधानमंत्री इस बात से संतुष्ट हैं कि इस संबंध में किया गया अंतिम निर्णय पूरी तरह से उचित और मामले की पात्रता के आधार पर किया गया था जो उनके समक्ष रखा गया था।’’ प्रधानमंत्री कार्यालय ने निर्णय का बचाव करते हुए सिंह द्वारा इससे पहले दिये गए बयानों का हवाला दिया कि सरकार के पास छुपाने को कुछ नहीं है और वह सीबीआई के साथ पूरा सहयोग करेगी जो इस मामले की जांच कर रही है।

ओडि़शा में तालाबिरा कोयला ब्लॉक का आवंटन हंगामे के केंद्रबिंदु में है जिसमें सीबीआई ने आदित्य बिड़ला समूह के अध्यक्ष कुमार मंगलम और पूर्व कोयला सचिव पी सी पारेख के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पारेख ने कहा है कि यदि वह षड्यंत्र के आरोपी थे तो प्रधानमंत्री को भी एक आरोपी बनाया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने इस संबंध में संशोधित निर्णय को मंजूरी दी थी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्वीकार किया कि आवंटन को लेकर अंतिम निर्णय पड़ताल समिति की सिफारिश से ‘‘अलग’’ था। प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा, ‘‘ऐसा एक पक्ष की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय में अपना पक्ष रखे जाने के बाद किया गया जिसे कोयला मंत्रालय को संदर्भित कर दिया गया था।’’

प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि सीबीआई इस मामले की जांच करने के लिए मुक्त है क्योंकि हो सकता है कि उसे आवंटन के बाद के कुछ दस्तावेज हाथ लगे हों। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बयान में कहा, ‘‘यह स्वीकार किया जाता है कि यह आवंटन (तालाबिरा कोयला ब्लाक) जारी जांच पर निर्भर है। इस जांच को लेकर सीबीआई पर किसी तरह की रोकटोक नहीं है और वह इस मामले में जरूरी कोई भी ताजा सूचना मांग सकती है।’’ इस मुद्दे पर ‘‘अत्यधित मीडिया कवरेज’’ के मद्देनजर जारी किये गए इस बयान में कहा गया है, ‘‘इस मामले में और अन्य मामलों में जांच कानून के तहत सामान्य आधार पर चलनी चाहिए।’’

प्रधानमंत्री कार्यालय ने घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा देते हुए कहा कि सिंह को कुमार मंगलम बिड़ला का 07 मई, 2005 की तिथि वाला एक पत्र मिला था। बिड़ला ने इस पत्र के जरिये हिंडाल्को के संबलपुर स्थित एकीकृत एल्यूमिनियम परियोजना के निजी इस्तेमाल वाले 650 मेगावाट उर्जा संयंत्र और ओडि़शा में हीराकुंड एल्युमिनियम संयंत्र के विस्तार के लिए 100 मेगावाट उर्जा संयंत्र के लिए ओडि़शा में तालाबिरा..दो और तीन कोयला ब्लॉक का आवंटन हिंडाल्को को करने का अनुरोध किया था।

बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने पत्र पर टिप्पणी की कि ‘‘कृपया कोयला मंत्रालय से एक रिपोर्ट प्राप्त करें।’’ प्रधानमंत्री कार्यालय ने पत्र को 25 मई 2005 को कोयला मंत्रालय को भेज दिया और उसे इस मामले में गौर करने और एक रिपोर्ट भेजने का अनुरोध किया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बयान में कहा कि बिड़ला ने 17 जून 2005 को प्रधानमंत्री को एक और पत्र भेजा जिसमें उन्होंने अपने पहले किये गए अनुरोध को दोहराया था। इस पत्र को पहले के संदर्भ से जोड़ते हुए कोयला मंत्रालय को भेज दिया गया। पत्र को मंत्रालय को इस अनुरोध के साथ भेजा गया कि वह इस मामले पर अपनी रिपोर्ट भेजे।

अगस्त 2005 में कोयला मंत्रालय ने इस मामले पर अपनी फाइल प्रधानमंत्री को भेजी जिसमें इस बात का उल्लेख किया गया था कि पड़ताल समिति ने तालाबिरा..दो कोयला ब्लाक के आवंटन के लिए तीन प्रमुख दावेदारों पर विचार किया और निर्णय किया कि यह ब्लॉक निवेली लिग्नाइट कार्पोरेशन को आवंटित कर दिया जाए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि निर्णय जिसमें हिंडाल्को को ब्लाक का आवंटन नहीं किया गया वह तीन कारणों पर आधारित था।


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