मध्य प्रदेश में अधिक मत के अंतर से विजयी दल सत्तारूढ़ होगा

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Sunday, October 20, 2013-10:59 AM

भोपाल: मध्यप्रदेश में चुनावी रिकार्ड के आंकडे बताते हैं कि सरकार किसी की भी बनी हो लेकिन कांग्रेस एवं भाजपा के बीच हमेशा कांटे की टक्कर रही है। हालांकि कुछ अन्य दलों ने वोटों में सेंधमारी कर चुनावी गणित को गड़बड़ किया है। मध्यप्रदेश में पिछले सात चुनावों के आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि कांग्रेस और भाजपा के बीच मतों का अंतर दो बार को छोडकर कभी भी छह प्रतिशत से अधिक नहीं रहा जबकि अन्य दल लगभग 20 प्रतिशत तक मत लेकर चुनावी गणित गड़बड़ाते रहें हैं।

 

वर्ष 1977 में जनता पार्टी भारी बहुमत से सत्ता में आई थी लेकिन उसमें हुई आपसी खींचतान के चलते उससे जल्दी ही जनता का मोह भंग हो गया और वर्ष 1980 में हुए विधान सभा चुनाव में अविभाजित मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने 47.51 मत प्राप्त कर दो तिहाई बहुमत से सरकार बनाई थी जबकि भाजपा को 30.34 प्रतिशत मत मिले थे और अन्य दल एवं निर्दलियों ने 22.15 प्रतिशत मतों पर कब्जा किया था।

 

इसी प्रकार वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की शहादत के बाद वर्ष 1985 में हुए विधानसभा चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस सरकार बनाने में सफल रही और उसे 48.57 प्रतिशत मत मिले जबकि भाजपा 32.47 प्रतिशत मत ही प्राप्त कर सकी। इस चुनाव में अन्य दल एवं निर्दलीय 18.96 मत ही प्राप्त कर सके।

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