‘बेटी अपनी पसंद का दूल्हा ढूंढे, नही तो होती हैं जबरन शादी’

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Monday, October 21, 2013-11:13 AM

कोलकाता: त्योहारों के मौसम में अलग अलग तरह के मेले लगना आम बात है लेकिन बाल विवाह के गैरकानूनी होने के बावजूद जनजातीय पश्चिम मिदनापुर में बाल विवाह मेले आयोजित किए जाते हैं जहां बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ आती है। महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन ‘सुचेतना’ की रिपोर्ट के अनुसार जनजातीय बाल विवाह के ऐसे मेले उत्सवों के इस मौसम में हर वर्ष आयोजित किए जाते हैं।

माओवादी हिंसा में कमी आने के बाद जनजातीय लोग निडर होकर अधिक संख्या में इस प्रकार के मेलों में भाग ले रहे हैं। ‘सुचेतना’ की सचिव स्वाति दत्त ने बीनपुर के निकट आयोजित ओरगोंडा पाताबिंदा मेले का उदाहरण दिया जिसमें पुरलिया और बांकुड़ा जैसे निकटवर्ती जिलों से हजारों जनजातीय लोग कम उम्र की अपनी लड़कियों की शादी कराने आते हैं।

दत्त ने कहा, ‘इस दौरान सिलदाह से बेल पहाड़ी तक 20 किलोमीटर के इलाके में एक लाख से अधिक जनजातीय लोग कई स्थानों पर मेले आयोजित करते हैं जहां लड़की के माता-पिता अपनी बेटी से अपनी पसंद का दूल्हा ढूंढने को कहते हैं।’ उन्होंने कहा कि लेकिन लड़कियों के पास अपना जीवनसाथी चुनने के लिए ज्यादा विकल्प नहीं होते। यदि वे इंकार कर देती हैं तो इन किशोरियों का विवाह जबरन करा दिया जाता है।


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