पवित्रा जैसे ही कई बने प्रिंसीपल के शिकार

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Thursday, October 24, 2013-2:26 PM

नई दिल्ली: अंबेदकर कालेज के प्रिंसीपल जी.के. अरोड़ा ने केवल पवित्रा को ही शिकार नहीं  बनाया था। उन्होंने कई लोगों को झूठे मामलों में फंसाकर कालेज से बाहर का रास्ता दिखाया था। कालेज में प्रिंसीपल की मनमानी इस कदर थी कि दिल्ली विश्वविद्यालय के आदेशों को भी वह रद्दी की टोकरी में डाल देते थे।

पूर्व प्रिंसीपल जी.के. अरोड़ा के शिकार बने दो लोगों वरिष्ठ सहायक महेश पाल और गणित के प्रवक्ता टी.पी. सिंह ने बीते सोमवार को एक बार फिर से कॉलेज ज्वाइन कर लिया है। कालेज के कार्यकारी (एक्टिंग)प्रिंसीपल आर.बी. सोलंकी ने दोनों के कालेज ज्वाइन करने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि दोनों लोगों के  ज्वाइन करने के आदेश दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से काफी पहले ही जारी कर दिए गए थे।

पीड़ित वरिष्ठ सहायक महेश पाल ने बताया कि वह 2008 में विदाउट पे छुट्टी (लीऑन) पर गए थे। इसके बाद जब वह वापस लौटे तो प्रिंसीपल जी.के अरोड़ा ने उन्हें कालेज ज्वाइन करने से मना कर दिया। उन्होंन जब इसकी शिकायत गवर्निंग बॉडी से की तो प्रिंसीपल ने इसे नाक का प्रश्न बना लिया। इसके बाद मामले को प्रिंसीपल ने फ्रेक्ट्स फाइंडिंग कमेटी को भेज दिया। इस कमेटी में प्रोफेसर सुधीश पचौरी, प्रोफेसर सिरोज अहमद और प्रोफेसर रामचंद्रन थे। कमेटी ने प्रिंसीपल को भेजी गई रिपोर्ट में महेश पाल को ज्वाइन करने को कहा, लेकिन प्रिंसीपल ने इस मामले को एक बार फिर से दिल्ली विश्वविद्यालय को भेज दिया।

महेश पाल का कहना है कि 2009 में दिल्ली विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने लिखित रूप में उन्हें ज्वाइन करने के आदेश दिए थे, इसके बावजूद उन्हें प्रिंसीपल ने नौकरी पर नही रखा था। कुछ ऐसा ही टी.पी सिंह के साथ भी किया गया। सिंह प्रिंसीपल की आंखों की किरकिरी थे। उन पर फर्जी तरीके से एक कालेज छात्रा के यौन शोषण का आरोप लगाकर उन्हें कालेज से निकाल दिया गया। वह भी तभी से लंबी लड़ाई लड़ रहे थे। प्रिंसीपल जी.के. अरोड़ा के जाने के बाद अब आकर दोनों लोगों को नौकरी नसीब हुई है।

सीबीआई जांच को लेकर उत्तरी परिसर में कैंडल मार्चसीबीआई जांच को लेकर उत्तरी परिसर में कैंडल
भीमराव अंबेदकर कॉलेज की पूर्व कर्मचारी पवित्रा भारद्वाज आत्मदाह मामले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर एएडी, डूटा, डूकू और डूसू ने डीयू के नॉर्थ कैंपस से कैंडल मार्च निकाला।कैंडल मार्च के दौरान लोगों ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों की राजनीति से लगता है कि पवित्रा को न्याय नहीं मिल पाएगा। इसलिए हम चाहतें हैं कि मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए। इससे पहले ए.ए.डी. अध्यक्ष आदित्यनारायण मिश्रा ने प्रेस कांफ्रेस में कहा  था कि पवित्रा जैसे मामले में आरोपी प्रिंसीपल जी.के. अरोड़ा पर केस दर्ज होने के बाद भी उसे गिरफ्तार नहीं किया है।

इससे पहले भी पुलिस की एफआईआर में प्रिंसीपल पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कराने के लिए छात्रों और कर्मचारियों ने कैंडल मार्च निकाला था। बुधवार को निकाला गया कैंडल मार्च नॉर्थ कैंपस में आर्ट फैकेल्टी से चलकर कई कॉलेजों से होते दोबारा आर्ट फैकेल्टी में ही समाप्त हुआ।
 


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