रहस्यमय खजाना: ‘सोना नहीं, गदर के दौर के हथियारों की खोज’

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Thursday, October 24, 2013-1:53 PM

नई दिल्ली: उन्नाव में चल रही खुदाई को सोने की तलाश मानने से इनकार करते हुए केंद्रीय संस्कृति मंत्री चंद्रेश कुमारी कटोच ने कहा कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने वहां धातु होने के संकेत दिए हैं जो 1857 की क्रांति के दौरान भारतीयों द्वारा इस्तेमाल किए गए हथियार भी हो सकते हैं।

उन्नाव के डौंडिया खेड़ा गांव में पिछले सात दिन से चल रही खुदाई में अभी तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम डेढ़ मीटर नीचे तक पहुंची है। एएसआई पर आरोप है कि उसने एक साधु शोभन सरकार के सपने के आधार पर खुदाई का काम शुरू कर दिया हालांकि अभी तक वहां 1000 टन सोना मिलने के कोई चिन्ह नहीं दिखे हैं।

कटोच ने एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘‘इस खुदाई का किसी साधु के सपने से कोई सरोकार नहीं है। हमने जीएसआई की रिपोर्ट के आधार पर काम शुरू किया और जो लोग मुझ पर आरोप लगा रहे हैं, मैं उन पर आरोप लगाती हूं कि वे एएसआई के नियमित काम में बाधा डाल रहे हैं। हम सिर्फ उन्नाव में ही नहीं बल्कि देश भर में 148 स्थानों पर खुदाई कर रहे हैं जो आम तौर पर पहली अक्तूबर से मानसून शुरू होने तक चलती है।’’

यह पूछने पर कि क्या उन्हें 1000 टन सोना मिलने की उम्मीद है, उन्होंने कहा, ‘‘जीएसआई रिपोर्ट में कहा गया है कि वहां धातु है। यह मैं कैसे कह सकती हूं कि धातु क्या है। वह कुछ भी हो सकती है। सोना, चांदी , स्टील या कुछ और। कोई तोप, मूर्ति, बंदूक भी हो सकती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम सोना नहीं बल्कि 1857 के गदर के दौरान भारतीयों द्वारा इस्तेमाल किये गए हथियार तलाश रहे हैं जो एएसआई के किसी संग्रहालय में नहीं हैं। उस इलाके के शासन राजा राम मोहन राव बख्श स्वतंत्रता सेनानी थे और गदर में शामिल थे और पूरी संभावना है कि उनके हथियार वहां जमीन के नीचे गड़े हों।’’

अभी तक डेढ़ मीटर की खुदाई में मिली चीजों के बारे में कटोच ने बताया, ‘‘हमें वहां से मिट्टी के बर्तन , कांच की चूडिय़ां, बच्चों के कूदने के खेल हापस्काच के अवशेष, छोटी छोटी मूर्तियां और दीवार के टुकड़े मिले हैं जिसमें गदर के दौर की ईंटे इस्तेमाल की गई है।’’

यह पूछने पर कि सोना मिलने पर उस पर दावा किसका होगा चूंकि उत्तर प्रदेश सरकार भी दावेदारी कर रही है, उन्होंने कहा कि इसका निर्धारण भारतीय निखात निधि अधिनियम के तहत किया जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत सरकार के भारतीय निखात निधि अधिनियम 1878 के तहत सोने समेत जो भी खजाना जमीन में गड़ा मिलता है, उसकी दावेदारी इसके प्रावधानों के अनुसार तय होती है। लेकिन यदि पुरातत्व महत्व की चीजें जैसे जेवरात या बर्तन हैं तो वह एएसआई को दिए जाएंगे।’’

उन्नाव के बाद आदमपुर में प्राचीन शिव मंदिर में अवैध खनन शुरू होने और पुजारियों के साथ मारपीट के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘‘हमें इसकी कोई जानकारी नहीं है। लेकिन मैं लोगों से अपील करूंगी कि अवैध खनन की जानकारी होने पर एफआईआर डाले या हमें शिकायत भेजें।’’

बिहार में ऐतिहासिक महत्व की चीजों के लिए खनन शुरू नहीं करने के एएसआई पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के आरोप को निराधार बताते हुए कटोच ने कहा कि नालंदा के लिए वह अतिरिक्त कोष की मांग कर रही हैं और जल्दी ही वृहद स्तर पर काम शुरू होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘नालंदा में अभी 7 प्रतिशत ही काम हुआ है। मैने उसके लिए अतिरिक्त कोष की मांग की है और वित्तमंत्री ने भी इसमें रूचि ली है। हम अतिरिक्त कोष के साथ वहां काम शुरू करने जा रहे हैं लिहाजा यह आरोप गलत है कि हम खनन के काम में पक्षपात कर रहे हैं।’’

उन्नाव में खुदाई के काम के लिए कोई समयसीमा तय करने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह के काम में आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल नहीं हो सकता बल्कि ये मानवीय श्रम के जरिए सावधानी से करना होता है ताकि हमारी धरोहरों को नुकसान ना हो। मैं फिलहाल कोई समय सीमा नहीं बता सकती और ना ही काम में जुड़े अधिकारियों पर जल्दी खुदाई के लिये दबाव बनाने दिया जाएगा।’’


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