उच्चतम न्यायालय का चिकित्सीय लापरवाही में 5.96 करोड़ रूपए का मुआवजा देने का आदेश

  • उच्चतम न्यायालय का चिकित्सीय लापरवाही में 5.96 करोड़ रूपए का मुआवजा देने का आदेश
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Thursday, October 24, 2013-8:39 PM

नई दिल्ली : चिकित्सीय लापरवाही के मामले में उच्चतम न्यायालय ने सर्वाधिक मुआवजा निर्धारित करते हुये आज कोलकाता स्थित एएमआरआई अस्पताल और इसके तीन डाक्टरों को अमेरिका स्थित भारतीय मूल के चिकित्सक को 5.96 करोड़ रूपए का ब्याज सहित भुगतान करने का आज आदेश दिया। शोधकर्ता कुणाल साहा की 29 वर्षीय बाल मनोचिकित्सक पत्नी का भारत यात्रा के दौरान 1998 में निधन हो गया था। 
      
न्यायमूर्ति चंद्रमौलि कुमार प्रसाद और न्यायमूर्ति वी गोपाल गौडा की खंडपीठ ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निबटान आयोग द्वारा निर्धारित मुआवजे की राशि 1.73 करोड़ रूपए से बढ़कार 5.96 करोड़ रूपए कर दी। न्यायाधीशों ने एएमआरआई अस्पताल और इसके चिकित्सकों को मृतक के पति कुणाल साहा को आठ सप्ताह के भीतर मुआवजे की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह मामला दाखिल करने के समय 1999 से मुआवजे की राशि पर छह फीसदी सालाना का ब्याज भी देना होगा।

साहा ने अमेरिका से भेजे गये ईमेल में इस निर्णय को ‘ऐतिहासिक’ बताते हुये कहा कि, ‘‘इसका भारत में चिकित्सीय लापरवाही और चिकित्सीय देखभाल के मानक पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।’’ उन्होंने कहा कि यह सभी लापरवाह चिकित्सकों और अस्पतालों को कड़ा संदेश देगा जो भारत में रोजाना निर्दोष मरीजों को चूस रहे हैं। इससे पहले, मई 2009 में शीर्ष अदालत ने चिकित्सीय लापरवाही के मामले में इंफोसिस के इंजीनियर प्रशांत एस ढनांका को एक करोड़ रूपए मुआवजा देने का आदेश दिया था। इस मामले में हैदराबाद स्थित निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में प्रशांत की रीढ़ की हड्डी आपरेशन के दौरान क्षतिग्रस्त हो गयी थी और बाद में 2011 में उसकी मृत्य हो गयी थी।


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