कविता के जरिए दिग्विजय ने किया मोदी पर अटैक

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Friday, October 25, 2013-2:09 PM

नई दिल्ली: गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अक्सर निशाना साधने वाले कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने इस बार उन पर कविता के माध्यम से व्यंग्य बाण छोडे हैं। सिंह ने ट्विटर पर एक कविता पोस्ट कर उत्तर प्रदेश के उन्नाव के डौंडिया खेडा में एक साधु के सपने के आधार पर सोना निकालने के लिए की जा रही खुदाई की मोदी के पहले आलोचना करने और फिर पलटने पर उन पर कटाक्ष किया है।

मोदी ने चेन्नई में एक कार्यक्रम में सोने के लिए खुदाई किये जाने की खिल्ली उड़ाई थी लेकिन बाद में उन्होंने साधु की प्रशंसा की थी। कविता में मोदी का नाम लिये बिना उन्हें बडबोला और पलटी खाने वाला करार दिया गया है। कविता की कुछ पंक्तियां इस प्रकार हैं।
 

‘बड़बोले’ जी फंस गए, कहकर इसे मजाक,
धर्म भीरू जनता हुई, सुनकर इसे अवाक।
सुनकर इसे अवाक, समझ में जल्दी आया।
वोट बैंक जो ठोस, उसे नाराज कराया।
कहें ‘अखिल’ कविराय, तुरत ही पलटी खाई,
‘करत संत सम्मान’, दे रहे खूब सफाई।
आगे करें विचार, आज मानी तो मानी।
कहें ‘अखिल’ कविराय, जरूरी है तरुणाई।
पर अनुभव के बिना, सफलता किसने पाई?
हठ कोई भी, है बुरी, सोच समझकर मान,
बाल, त्रिया और राज हठ, करती है नुकसान।
करती है नुकसान, सदा कहते हैं ग्यानी।


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