आगरा की ऐतिहासिक इमारतों के आसपास से हटेगा अतिक्रमण

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Friday, October 25, 2013-4:29 PM

आगरा: ताजनगरी आगरा के जिला प्रशासन ने ऐतिहासिक इमारतों के आसपास से सभी अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया है। आगरा के जिलाधिकारी जुहेर बिन सगीर ने गुरुवार को बताया कि इस काम के लिए एक समिति गठित की गई है। एक हफ्ते के अंदर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने का काम शुरू हो जाएगा।

उन्होंने बताया कि इस मामले में उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से सभी अवैध निर्माणों की पहचान करके उन्हें चिन्हित करने और उन्हें गिराने को कहा गया था। जोनल मजिस्ट्रेट अतिक्रमण की वीडियोग्राफी करेंगे। कानून का उल्लंघन कर हुए अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने या उन्हें हटाने के लिए संबंधित लोगों के पास एक हफ्ते का समय है।

जिलाधिकारी ने चेताया, ‘‘एक हफ्ते बाद किसी को नहीं बख्शा जाएगा।’’ संरक्षणवादियों ने, 1556 और 1658 के बीच मुगल शासकों द्वारा बनाई गई इन इमारतों के आसपास अवैध निर्माण से खतरे की आशंका जताई थी। हालांकि नगर प्रशासन ने अवैध बस्तियों पर रोक लगाने के लिए थोड़े प्रयास तो किए थे, लेकिन अवैध निर्माण के कारण शहर में स्थित कम मशहूर लेकिन ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इमारतों के लिए खतरा बढ़ गया है।

जमीन की कीमत बढऩे के साथ ही, बिल्डरों ने शहर की एक-एक इंच जमीन को हड़पना शुरू कर दिया है। मुगल इतिहासकार आर.नाथ कहते हैं, ‘‘आजादी के समय आगरा शहर में 240 से ज्यादा ऐतिहासिक स्मारक इमारतें थीं, लेकिन अब इनमें से सिर्फ 50 ही बची हैं।’’ सेंट जॉन कॉलेज के इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष अमित मुखर्जी ने कहा, ‘‘संरक्षण और परिरक्षण को सरकारी एजेंसियों और जन संगठनों का संयुक्त उद्यम बनना होगा।’’  लुप्त स्मारकों में ईसाइयों के कब्रिस्तान भी शामिल हैं। पुराने आगरा वासियों का कहना है कि आज की अपेक्षा 1960 और 1970 के दशक में शहर बेहतर तरीके से नियोजित और अनुरक्षित था।

1528 में मुगल बादशाह बाबर द्वारा यमुना किनारे स्थित राम बाग भारत का सबसे पुराना बाग है। सिकंदरा के पास अकबर की बीवी और मरियम का मकबरा भी ऐसे स्मारक हैं जिन पर अतिक्रमण का खतरा है। इसके अलावा बाग फरजाना और बेगम समरू बाग जैसे मुगल कालीन बागों की बहाली की जरूरत है। एक बार ये बाग बहाल हो गए तो ताज महल आने वाले पर्यटकों के यहां आने की संभावना बढ़ जाएगी। एएसआई द्वारा अतिक्रमण और अवैध निर्माण के संदर्भ में जिला प्रशासन को नोटिस भेजने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया।

मुखर्जी ने बताया कि स्मारकों के आसपास का खुला स्थान डिजाइन का हिस्सा है जिससे इमारत के चारों ओर हरियाली रहे। सेफर एंड बेटर आगरा’ समूह ने उत्तर प्रदेश पर्यटन और आगरा नगर निगम को दिए एक ज्ञापन में अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। एक समर्थक ने आईएएनएस से कहा, ‘‘कार्रवाई राजनीतिज्ञों से शुरू होनी चाहिए, जो सार्वजनिक जमीन पर कब्जा करके बैठे हैं।’’

 


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