PM, लालू बनकर फोन करने वाले शख्स को जमानत

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Sunday, October 27, 2013-10:45 AM

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद बनकर लोगों से फायदा उठाने और धन ऐंठने के लिए उन्हें फर्जी फोन कॉल करने के आरोपी शख्स को दिल्ली की एक अदालत ने जमानत दे दी है।

मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट लोकेश कुमार शर्मा ने टी-सीरीज सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज के पूर्व कर्मचारी 33 वर्षीय कृष्णन कुमार को जेल से बाहर निकाले जाने की अनुमति दी लेकिन उसे राष्ट्रीय राजधानी से बाहर निकलने पर रोक लगा दी।

अदालत ने कहा, ‘‘आज की तारीख में कृष्णन के खिलाफ मुख्य आरोप है कि उसने सह-आरोपी विकास दत्त शर्मा के साथ साजिश रचते हुए फरियादी के प्रबंधक वीर सिंह को जबरन वसूली के लिए फोन कॉल किए।’’

अदालत ने कहा, ‘‘आरोपी 23 सितंबर से न्यायिक हिरासत में है और जांच अधिकारी द्वारा आगे पुलिस हिरासत में रिमांड की जरूरत नहीं है इसलिए ऐसा लगता है कि उसके मामले में जांच पूरी है और उसे आगे हिरासत में रखने से कोई मकसद नहीं हल होने जा रहा। उसके आवाज के नमूने ले लिये गये हैं।’’

सितंबर में दर्ज प्राथमिकी में एक कंपनी के निदेशक वेद प्रकाश चनाना ने कहा कि उन्हें पिछले कुछ महीने से नकली फोन कॉल किये जा रहे हैं। ग्रेटर कैलाश-2 के निवासी चनाना ने आरोप लगाया कि धोखाधड़ी करने वाले शख्स ने खुद को भाजपा सांसद शत्रुघन सिन्हा तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुपति सेवुगन बताकर भी फोन किया।

अदालत ने कहा, ‘‘आरोपी कृष्णन कुमार को 50,000 रुपये की जमानत राशि और इतनी ही राशि का मुचलका जमा करने पर जमानत देने की मंजूरी दी जाती है और यह शर्त भी रहेगी कि वह हर पखवाड़े जांच अधिकारी को उनके दफ्तर में रिपोर्ट करेगा। वह बिना पूर्व अनुमति के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से बाहर नहीं जाएगा तथा जांच को प्रभावित नहीं करेगा। वह किसी गवाह को धमकाएगा या नहीं और जांच अधिकारी के निर्देश पर जांच के लिए आएगा।’’

शुरुआत में पुलिस ने कृष्णन को गिरफ्तार किया। उससे पूछताछ के आधार पर 34 वर्षीय विकास दत्त शर्मा को मामले में उसकी कथित संलिप्तता के बारे में पूछताछ के लिए पकड़ा गया। बाद में विकास को इसी महीने जमानत पर छोड़ दिया गया था।

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने बताया कि कृष्णन, विकास और उनके साथी कंपनी के अधिकारियों को तीन अलग अलग नंबरों से फोन करके 20 लाख रुपये और अन्य फायदे पहुंचाने की मांग कर रहे थे। आरोपियों पर आईपीसी की धारा 419 (नकली रूप रखकर धोखाधड़ी करना), 507 (गुमनाम संदेश देकर आपराधिक तरीके से धमकाना), 387 (जबरन वसूली), 511 (अपराध की कोशिश करना), 120-बी (आपराधिक साजिश) और 201 (साक्ष्यों को नष्ट करने) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

कृष्णन को जमानत पर छोड़ते हुए अदालत ने यह भी कहा कि जहां तक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड हासिल करने से जुड़े आरोप हैं तो कोई पीड़ित या फरियादी इस आरोपी के खिलाफ शिकायत करने आगे नहीं आया है।


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