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मुजफ्फरनगर हिंसा: घर न लौटने वाले परिवारों को 5 लाख रुपये मदद

  • मुजफ्फरनगर हिंसा: घर न लौटने वाले परिवारों को 5 लाख रुपये मदद
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Sunday, October 27, 2013-3:57 PM

लखनऊ/मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश सरकार मुजफ्फरनगर और शामली जिले में हिंसा भड़कने के बाद गांव छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेने वाले उन मुस्लिम परिवारों को पांच लाख रुपये (प्रति परिवार) आर्थिक मदद देगी, जो वापस अपने घर जाने को तैयार नहीं हैं।

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने शनिवार देर रात बताया कि हिंसा पीड़ितों को एकमुश्त आर्थिक मदद देने का मकसद है कि पीड़ित परिवार शिविरों पर आश्रित रहने के बजाय अपने को पुर्नस्थापित कर सकें। इसके लिए लगभग 90 करोड़ रुपये का अनुमानित व्यय राज्य सरकार वहन करेगी।

प्रवक्ता ने बताया कि सरकार द्वारा इन परिवारों को एकमुश्त सहायता देने का निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि पीड़ित परिवारों को यह स्वतंत्रता रहे कि राजकीय सहायता प्राप्त कर लोग जिस जगह पर चाहें अपना जीवनयापन कर सकें।

प्रवक्ता ने कहा कि स्थानीय प्रशासन द्वारा मुजफ्फरनगर के छह गांवों एवं शामली के तीन गांवों से विस्थापित परिवारों के सम्बन्ध में यह सूचित किया गया था कि इन गांवों के अधिकांश मुस्लिम परिवार घर छोड़कर पलायन कर गए हैं।

प्रदेश सरकार द्वारा स्थानीय प्रशासन से प्राप्त आंकड़ों को आधार बनाते हुए यह निर्णय लिया गया कि हिंसा प्रभावित परिवार पुनर्वासित तभी हो सकते हैं, जब उनको राज्य से आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। मुजफ्फरनगर एवं शामली जिलों में ऐसे लगभग 1,800 परिवार हैं, जो हिंसा के दौरान प्रभावित हुए तथा अपना गांव छोड़कर पलायन कर गए।

 भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य सरकार के इस कदम की आलोचना की है। पार्टी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार मुस्लिम वोट कार्ड खेलने से बाज नहीं आ रही है। सरकार की यह घोषणा आग में घी डालने जैसा है।

पाठक ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश अपनी सरकार के निकम्मेपन से घबराए हुए हैं, इसीलिए उन्होंने मुजफ्फरनगर में मुआवजे का खेल खेला है। सपा सरकार वोट की खातिर सिर्फ मुस्लिम-मुस्लिम की रट लगाए हुए है, क्योंकि उसके पास मुसलमानों के वोट लेने के लिए अब बताने को कुछ नहीं है।

गौरतलब है कि विगत सात सितंबर को मुजफ्फरनगर में भड़की हिंसा में 62 लोगों की मौत हो गई जबकि करीब 45 हजार लोग बेघर हो गए।

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