चुनावी साल में गन्ने की तबाही के हालात

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Monday, October 28, 2013-9:25 AM

मुजफ्फरनगर, (राकेश त्यागी): चुनावी साल के दौरान यूपी में गन्ने की तबाही के हालात बन रहे है। यूपी से देश को आधा गन्ना मिलता है, लेकिन पैराई करने वाली मिलें गन्ने की खरीद से ही इंकार कर रही है। पैराई का सीजन मुंहाने तैयार खड़ा होने के बावजूद अभी तक गन्ने का भाव ही तय नहीं हो पाया है।

गन्ने की दुर्गति के आसार चीनी आयात मुक्त नीति बनाने से हुई है। इम्पोर्ट फ्री करने पर देश में विदेशों से सस्ती चीनी आयात की जा रही है। सस्ती चीनी भारतीय बाजार में धकेले जाने से महंगी बनी घरेलू चीनी पिट रही है। सीजन में चीनी का भाव 3 हजार 6 सौ रूपए प्रति कुंतल था, जो कि अब 600 रूपए घट जाने के बाद 3 हजार रूपए प्रति कुंतल से नीचे है।

चीनी का भाव लगातार पिटने से यूपी की शुगर मिले घाटे में चली गई है। किसानों को उनके गन्ने के बकाया का भुगतान नहीं दे पा रही है। घाटे की वजह से मिलों की तरफ गन्ने के बकाया का भुगतान 24 सौ करोड़ रूपया अभी भी खड़ा है। जानकारों के मुताबिक दक्षिण भारत में श्री रेणूका शुगर्स लिमिटेड के नाम की कंपनी है।

इसकी दो रिफायनरी कच्ची चीनी को साफ करके मोटा माल बना नही है। इनमें से एक गुजरात के कांडला दूसरी वैस्ट बंगाल के हल्दिया पोर्ट में लगी है। उसकी दोनों रिफायनरी विदेशों से सस्ती आयात की गई चीनी को भारतीय बाजारों में धकेल जमकर चांदी काट रही है। कंपनी के पीछे केन्द्र में कैबिनेट के एक कद्दावर मंत्री का हाथ है।

वहीं दूसरी तरफ इसका असर घरेलू चीनी के भाव को भुगतना पड़ रहा है। विदेशों से आयात की गई सस्ती चीनी देश के बाजार में आने से घरेलू चीनी का भाव लगातार कम होता जा रहा है। भाव कम होने से मिलों की आर्थिक स्थिति जहां बद से बदत्तर हुई है, वहीं रेणूका कंपनी जमकर फल फूल रही है।

रेणूका कंपनी ने ब्राजील में भी दो चीनी मिलें खरीद ली है। गन्ने के हालत को सुधारने के लिए यदि सरकार ने आयात बंद करके निर्यात को बढ़ावा दिया तो इस कंपनी के दोनों हाथ में लड्डू रहेंगे। ऐसी दशा में निर्यात को बढ़ावा देने की बजाय सरकार को गन्ने की खरीद पर सोसायटी को सीधे छूट उपलब्ध करवानी चाहिए।

50 लाख किसानों की आजीविका गन्ना : अजित
केन्द्रीय उड्डयन मंत्री और रालोद के मुखिया चौधरी अजित सिंह कहते है कि उत्तर प्रदेश में 50 लाख किसान और उनके परिवार गन्ने से अपनी आजीविका चलाते हैं। यहां प्रतिवर्ष 135 से 140 मिलियन टन गन्ना पैदा करते हैं, जो देश में सर्वाधिक है। चीनी उद्योग उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा उद्योग है।

चीनी उद्योग को वर्ष 2012-13 के चीनी सीजन में 3000 करोड़ रुपए का नकद घाटा हुआ और उससे पहले वर्ष में और 1000 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। अगले 8-10 महीनों में 30-40 लाख टन चीनी का निर्यात करने की जरूरत है। भारत में चीनी आयात करने का कोई कारण नहीं है।

पार्लियामेंट चुनाव में किसान देगा जवाब
हालात को देखकर लगता सूबे या केन्द्र की दोनों सरकारों को किसानों की परवाह नहीं है। हालात नहीं सुधरे तो यूपी में सपा और केन्द्र में काबिज कांगे्रस की लुटिया डूबेगी। अगले माह नवंबर से लेकर 6 माह अप्रैल तक गन्ने का सत्र सीजन है। उधर, अगले 6 माह बाद ही मई माह में पार्लियामेंट का चुनाव होगा।
 
 

Edited by:Rakesh Tyagi

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