राहुल की रैली में रहा जाट-गुर्जरों का दबदबा

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Monday, October 28, 2013-1:39 PM

वेस्ट दिल्ली (राजन/ताहिर): मंगोलपुरी में हुई राहुल गांधी की पहली चुनावी रैली के दौरान बेशक भीड़ कम रही हो, लेकिन रैली के दौरान स्थानीय जाट व गुर्जरों का बोलबाला रहा। रैली के दौरान बड़ी संख्या में ढि़चाउ कलां, सरहेरा, मित्राउं, नरेला, रणहौला और अलीपुर गांव से जाट और गुर्जर पहुंचे हुए थे। रैली में जितनी भीड़ का दावा किया गया था, उससे काफी कम लोगों के पहुंचने की वजह से अब यह भी सवाल उठ रहा है कि इसकी गाज किस पर गिरेगी।

मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने रैली में एक लाख पब्लिक के जुटने का दावा किया था। लेकिन रैली ने शीला के दावे की पोल खोल दी है। राहुल के भाषण के दौरान सैकड़ों कुर्सियां खाली पड़ी थी। कांग्रेस की रणनीति दिल्ली में राहुल की पहली चुनावी रैली कराके चुनावी दंगल को धार देने की थी। लेकिन इस प्रयास को गहरा झटका लगा है। रैली की तैयारियों में पिछले पंद्रह दिनों से कांग्रेस ने पूरी ताकत झोक दी थी। दिल्ली सरकार के सभी मंत्री तैयारियों पर नजर रखे हुए थे।

रैली का आयोजन कांग्रेस के गढ़ में हो रहा था, जहां से मौजूदा लोक निर्माण मंत्री राजकुमार चौहान पिछली बार रिकॉर्ड मतों से जीते थे। परिस्थितियां हर तरह से अनुकूल होने के बावजूद दस हजार की भीड़ भी नहीं जुटना कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या शीला सरकार से लोगों का मोहभंग हो रहा है? या फिर दिल्लीवासियों में राहुल को लेकर वह क्रेज नहीं है जो मोदी को लेकर है। राजनीतिक प्रेक्षक मानते हैं कि महंगाई और बिजली-पानी को लेकर मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग का कांग्रेस से मोहभंग हो रहा है।

कांग्रेस का विकास आम जनजीवन की दुश्वारियों को हल करने में विफल साबित हो रहा है। ऐसे में लोगों में कांग्रेस को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। रैली की तैयारियों पर स्वयं मुख्यमंत्री नजर रख रही थीं। उन्हें रैली में भारी भीड़ जुटने की उम्मीद थी। पब्लिक को लाने के लिए डेढ़ सौ बसों के इंतजाम किए गए थे। लेकिन भीड़ जुटने की उम्मीदों को गहरा झटका लगा। उम्मीदों के मुताबिक भीड़ नहीं जुटने के बावजूद

राहुल की मौजूदगी में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं दिल्ली के प्रभारी डॉ. शकील अहमद ने भारी भीड़ जुटने का दावा करते हुए कहा कि मैदान से ज्यादा भीड़ मैदान से बाहर खड़ी है। जबकि हकीकत यह थी कि कला मंदिर रामलीला मैदान का आधा से ज्यादा हिस्सा खाली था। राहुल को देखने की आतुरता में पब्लिक अपनी सीटों से खड़ी हो गई थी, जिससे खाली मैदान और खाली कुर्सियां सामने से नजर नहीं आ रही थी। शायद राहुल भी स्थितियों को भांप गए थे। उन्होंने महसूस कर लिया था कि रैली में आने वालों में ज्यादातर पार्टी कार्यकत्ताओं की फौज है। उन्होंने कार्यकत्ताओं से आहवाह्न किया वे घर-घर जाए और पार्टी की उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाए। हालांकि कांग्रेस ने भीड़ कम होने को लेकर की जा रही चर्चाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल का कहना है कि बड़ी संख्या में पब्लिक राहुल को सुनने के लिए आयी थी।  

Edited by:Jeta

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