गले की फांस बना पूर्ण राज्य का मुद्दा

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Tuesday, October 29, 2013-1:34 PM

नई दिल्ली( अशोक शर्मा ): दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने का मामला विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश कांग्रेस ही नहीं बल्कि दिल्ली सरकार के लिए भी एक तरीके से गले की फांस बन गया है। बेशक पार्टी के नेताओं की इस बारे में अलग-अलग राय है, लेकिन पार्टी के नेता अब जनता की इस पुरजोर मांग की अनदेखी भी नहीं करना चाहते।

नेताओं तो डर है कि चुनाव घोषणापत्र में इसे शामिल नहीं किया गया, तो चुनाव पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।  दूसरी ओर भाजपा के नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर पहले ही डंका बजा दिया है। गेंद अब केन्द्र और दिल्ली सरकार के पाले में है। देखना यह है कि कांग्रेस का रूख क्या रहता है।

मुख्यमंत्री शीला दीक्षित बार-बार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के आगे दिलली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की आवाज उठा रही हैं लेकिन पार्टी के किसी भी शीर्ष नेता ने खुलकर अपनी स्वीकृति प्रदान नहीं की है। अब चर्चा इस बात को लेकर भी है कि क्या कांग्रेस चुनाव घोषणापत्र में इस मांग को शामिल करेगी या नहीं? क्या होगा यह तो बाद में पता चलेगा, लेकिन जानकारों का कहना है कि चुनाव घोषणापत्र तैयार कर रही कमेटी के सदस्य मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के अध्यक्ष के उस निर्देश का इंतजार कर रहे हैं कि इस मुद्दे को इस बार घोषणापत्र में शामिल किया जाएगा या नहीं।
 
याद रहे कि कांग्रेस और भाजपा पिछले डेढ़ दशक से चुनाव से पूर्व जारी किये जाने वाले अपने घोषणापत्रों में इस बात की दुहाई दे रहे हैं कि चुनाव जीतने पर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देंगे। लेकिन कांग्रेस ने कुछ नहीं किया। वजह दिल्ली में कांग्रेस की सरकार पिछले 15 सालों से और केन्द्र में कांग्रेस की सरकार 10 सालों से है। जब केन्द्र और दिल्ली में एक ही पार्टी की सरकार है, तो देरी क्यों की गई और रुकावट कहां रही। अब पार्टी के नेता यहां तक कह रहे हैं यदि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना संभव नहीं है, तो नेताओं दुवारा उसका राग न अलापा जाए।

कांग्रेस के नेता इस बारे में बेशक कुछ भी राय व्यक्त करें, लेकिन भाजपा के नेता इस मुद्दे को विधानसभा चुनाव में भुनाने से नहीं चूकना चाहते। शायद इसी बात को ध्यान में रखते हुए भाजपा के दिल्ली प्रभारी नितिन गडकरी ने यह घोषणा कर दी है कि चुनाव जीतने पर दिल्ली को राज्य का दर्जा दिलाकर हम जनता को हरसंभव उसका हक दिलायेंगे। कांग्रेस के नेताओं को इसकी भनक लग गई है।

इसीलिए वह इस मामले की अनदेखी नहीं करना चाहते और मुख्यमंत्री शीला दीक्षित अब नेताओं के समक्ष दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की बात उठा रही हैं। कांग्रेस को डर है यदि इस बार चुनाव घोषणापत्र में इस मुद्दे को शामिल नहीं किया गया, तो भाजपा इसका फायदा उठा सकती है।


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