अब तक नहीं मिला सोना, लेकिन जारी रहेगी खुदाई: ASI

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Wednesday, October 30, 2013-9:43 AM

नई दिल्ली: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने हजार टन सोने की तलाश में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के डौडियाखेडा गांव में खुदाई बन्द करने की रिपोर्ट का कल खण्डन किया।  एएसआई के महानिदेशक प्रवीण श्रीवास्तव ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पहले गड्ढे में 4.8 मीटर के स्तर तक खुदाई हो चुकी है जिसमें 4.6 मीटर पर कंकडों की ठोस सरंचना मिली है जिसकी छानबीन की जा रही है। उन्होंने बताया कि दो तीन दिन इस गड्ढे में और खुदाई होगी तथा भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग से भी इस बारे में परामर्श किया जाएगा।

श्रीवास्तव ने बताया कि कल एक और स्थान पर खुदाई शुरू की जा रही है। यह स्थान गंगा तट के पास है और खुदाई के लिए सुझाए गए 20 मीटर के दायरे के अंदर है। उन्होंने बताया कि इस गड्ढे की खुदायी के बारे में 15 दिन के अंदर किसी नतीजे पर पहुंचना संभव होगा।

उन्होंने बताया कि अब तक खुदाई में सोने या अन्य कीमती धातु की कोई सामग्री नहीं मिली है। कांच की चूडिय़ा, चूल्हे, बर्तन और कुछ सजावटी सामान मिला है जो ईसा पूर्व पहली सदी से लेकर 18 वीं सदी तक का है।

यह पूछे जाने पर कि क्या खुदाई संत शोभन सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए मानचित्र एवं दस्तावेजों के आधार पर हो रही है। श्रीवास्तव ने कहा कि एएसआई को मानचित्र या दस्तावेजों के बारे में कुछ नहीं पता है

यह पूछे जाने पर कि क्या ए एस आई को किसी खुदाई में कभी सोना मिला है, अतिरिक्त महानिदेशक डा. बी. आर. मणि ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2001-02 में माण्डी गांव में खुदाई में ईसा पूर्व 2000 यानी हडप्पाकाल के दौरान के स्वर्णाभूषण मिले थे जिनका वजन 10 से 12 किलोग्राम था।

उल्लेखनीय है कि उन्नाव के संत शोभन सरकार ने दावा किया था कि डौंडियाखेडा में राजा राव रामबख्श सिंह के किले में हजार टन
सोना दबा है। उनके कहने पर केन्द्रीय कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री चरणदास महंत ने सरकार ने बात आगे बढ़ाई। इसलिए भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग ने यंत्रों से सर्वेक्षण करके बताया कि 5.20 मीटर की गहराई में धातु का भण्डार दबा हुआ है। इसके बाद एएसआई ने 18 अक्टूबर को खुदाई शुरू की थी।

श्रीवास्तव ने कल दोहराया कि वह किसी सोने के लिए खुदाई नहीं कर रहे हैं। यह स्थान पुरातात्विक महत्व का पहले से ही था। सरकार के कहने पर प्राथमिकता में लेकर इसकी खुदाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि पुरातात्विक खुदाई की गति बहुत धीमी होती है तथा इसमें सभ्यता से जुडी वस्तुएं मिलती है और सभ्यता के विकास क्रम का भी पता चलता है।


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