अब बुलेट ट्रेन से एक घंटे में पहुंचें चंडीगढ़

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Wednesday, October 30, 2013-1:54 PM

नई दिल्ली,(सुनील पाण्डेय): यात्री कृपया ध्यान दें...। देश की राजधानी दिल्ली और चंडीगढ़ के बीच अगर आप ट्रेन से सफर करते हैं तो 4 से 6 घंटे तक का समय लग जाता है, लेकिन आने वाले दिनों में हो सकता है कि आप सिर्फ एक घंटे के अंदर यह फासला तय कर लें।

प्रति घंटे 300 किलोमीटर की रफ्तार से दौडऩे वाली बुलेट ट्रेन का सपना सच होने में तो अभी लंबा समय लगेगा, लेकिन आप कुछ सालों में ही सेमी हाई-स्पीड ट्रेनों में जरूर सफर कर सकेंगे। यह ट्रेन 160 से 200 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलेगी। यानी दिल्ली से चंडीगढ़ आप एक घंटे में पहुंच जाएंगे।

रेल मंत्रालय ने सेमी हाई-स्पीड ट्रेन चलाने के प्रस्ताव पर काम करना शुरू कर दिया है। सबसे पहले देश के प्रमुख शहरों दिल्ली-भोपाल, दिल्ली-लखनऊ और दिल्ली-चंडीगढ़ के शताब्दी रूटों पर ट्रेनों की गति को बढ़ाकर 160 से 200 किलोमीटर प्रतिघंटा के बीच करने की योजना है। इसके लिए हाई स्पीड रेलवे कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का गठन किया है, जो भारत में इस सपने को साकार करने का काम करेगा।

रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खडग़े ने इस योजना के बारे में कहा, सेमी हाई-स्पीड ट्रेन कम लागत में ज्यादा सुविधायें दे सकेंगी, क्योंकि इसके लिए रेलवे को न तो अलग कॉरिडोर बनाने की जरूरत होगी और न ही अलग लाइन बिछानी पड़ेगी, जबकि बुलेट ट्रेन के लिए न सिर्फ विशेष ट्रैक की जरूरत है, बल्कि उसपर खर्चा भी ज्यादा है।

सेमी हाई-स्पीड सेवा की शुरुआत एक या 2 ट्रेनों के साथ होगी, उसके बाद शताब्दी, दुरंतो और राजधानी जैसी ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। फिलहाल शताब्दी, दुरंतो और राजधानी जैसी ट्रेनों की अधिकतम गति  130 से 150 किलोमीटर प्रतिघंटा के बीच है। गति बढऩे के बाद मुंबई या चंडीगढ़ से दिल्ली तक की यात्रा का समय एक से 3 घंटे तक कम हो जाएगा।

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अरुनेन्द्र कुमार ने इस सुविधा के बारे में कहा, हालांकि अभी इस ट्रेन में सफर करने के लिये आपको कितना इंतजार करना होगा। ये तय नहीं है, लेकिन मुमकिन है कि आर्थिक संकट से जूझ रही रेलवे कम लागत की इस योजना को जल्द हकीकत में बदलने की कोशिश करेगी।

200 की स्पीड के लिए चाहिए अलग ट्रैक:
रेल मंत्री मलिकार्जुन खडग़े ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा यात्री रेल होने के कारण लोगों की यह उम्मीद स्वभाविक है कि वो उन्हें हाई स्पीड (तेज गति) रेलयात्रा उपलब्ध कराये। अधिकतर देश 250 से 300 किलोमीटर प्रतिधंटा की गति से चलने वाली रेल गाड़ी को तेज गति क्षमता वाले मानते हैं। इसके लिए समर्पित ट्रैक और उसका बाड़ से घिराव आवश्यक होता है और इसमें लागत भी अधिक आती है।

हमारे देश में ट्रैक के पास बाड़ लगाने से जुड़ी अन्य समस्याएं हैं। इसलिए, रोलिंग स्टॉक तकनीकी से अभी बिछे ट्रैक पर 160 से 200 किलोमीटर प्रतिधंटा की रफ्तार से तेज गति की गाडिय़ां चलाने की तात्कालिक आवश्यकता कम लागत में पूरी हो सकती है। 200 किलोमीटर प्रतिधंटा की रफ्तार से ऊपर के लिए अलग ट्रैक बिछाना होगा और उसके इर्द-गिर्द बाड़ लागाना होगा।


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