भ्रष्टाचार करने पर दंडित होंगे पार्षद: सुप्रीम कोर्ट

  • भ्रष्टाचार करने पर दंडित होंगे पार्षद: सुप्रीम कोर्ट
You Are HereNcr
Wednesday, October 30, 2013-2:36 PM

नई दिल्ली: अब भ्रष्टाचार करने पर पार्षदों के खिलाफ  भी मुकदमा चल सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पार्षद भी जनसेवकों की श्रेणी में आते हैं। कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत लोक प्रशासन में शुचिता लाने के लिए जनसेवक की परिभाषा का दायरा बढ़ाया गया है।

विधायिका ने जनसेवकों के भ्रष्टाचार को रोकने और उन्हें दंडित करने के मकसद से इस परिभाषा का व्यापक इस्तेमाल किया है। मामला राजस्थान के बांसवाड़ा के पार्षद मनीष त्रिवेदी की अपील का था। उन पर नगर निगम बोर्ड के सदस्य के पद पर रहते हुए 50 हजार रुपए की रिश्वत लेने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सीके प्रसाद और के एस खेहर की बेंच ने यह टिप्पणी की।

भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत दाखिल चार्जशीट में वे नामजद हैं। त्रिवेदी ने कहा कि पार्षद होने के नाते वे इस कानून के दायरे में नहीं आते। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस बात में कोई संदेह नहीं है कि वे भ्रष्टाचार निरोधक कानून की विभिन्न धाराओं के तहत जनसेवक हैं। वे उस पद पर बैठे हैं जिसके तहत वे बतौर जनसेवक जनता की सेवा करने के लिए अधिकृत हैं।

अपना सही जीवनसंगी चुनिए| केवल भारत मैट्रिमोनी पर- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन

Recommended For You