सांप्रदायिकता के खिलाफ एकजुटता या तीसरे मोर्चे की तैयारी?

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Wednesday, October 30, 2013-9:58 PM

नई दिल्ली: संप्रग के घटक राकांपा सहित गैर भाजपा और गैर कांग्रेस 14 पार्टियां आज एक साझा मंच पर जुटीं। सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लडाई मुद्दा था लेकिन इस जमावडे को अगले लोकसभा चुनावों के लिए तीसरे मोर्चे के संभावित गठन के पहले कदम के रूप में देखा जा रहा है।

वाम दलों द्वारा प्रायोजित ‘‘सांप्रदायिकता के खिलाफ जन एकता का सम्मेलन’’ में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और अन्नाद्रमुक एवं बीजद के प्रतिनिधि शामिल हुए।

चौदह दलों के इस सम्मेलन में शामिल नेता भले ही इंकार के अंदाज में कुछ कह रहे हों लेकिन ये स्पष्ट उम्मीद है कि आगामी लोकसभा चुनाव में यह भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ एक मंच बन सकता है।

नरेन्द्र मोदी के मुददे पर भाजपा से 17 साल पुराने रिश्ते तोडने वाले नीतीश कुमार के सामने जब यह सवाल रखा गया तो उन्होंने स्पष्ट किया, ‘‘हमसे पूछा जा रहा है कि क्या कोई नया मोर्चा बन रहा है। आज की तारीख में ऐसा नहीं है। लेकिन हमें सांप्रदायिकता, आतंकवाद और फासीवाद के खिलाफ सोचना होगा और एकजुट होना होगा।’’


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