चुनाव आते ही सवा लाख प्रभारियों ने छोड़ा 'आप' का दामन

  • चुनाव आते ही सवा लाख प्रभारियों ने छोड़ा 'आप'  का दामन
You Are HereNational
Saturday, November 02, 2013-1:52 PM

नई दिल्ली,(निहाल सिंह): राजनीति के अखाडे में 6 महीने पहले कदम रखने वाली आम  आदमी  पार्टी (आप) ने जिन प्रभारियों के दम पर चुनाव लडऩे का दावा ठोका था वो अब आप पार्टी से किनारा कर गए हंै। सवा लाख प्रभारियों में से एक लाख पन्द्रह हजार प्रभारियों ने आप का दामन छोड़ दिया है।

प्रभारियों के मैदान छोडऩे से आप पार्टी सकते में है। आप पार्टी के गठन के समय प्रभारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी गयी थी कि वो दिल्ली में घर-घर जाकर लोगों की नब्ज टटोलने के बाद न सिर्फ उनकी समस्या के समाधान का भरोसा दें बल्कि समाधान के लिए लोगों के साथ कदम से कदम मिला कर भी चलें। दिल्ली  विधानसभा चुनाव में लगभग एक महिने का समय बचा है और ऐन मौके पर प्रभारियों के पार्टी का दामन छोडऩे से तमाम नेताओं और कार्यकर्ताओं में खलबली सी मच गयी है।

अब कैसे होगी चुनावी लड़ाई :
दिल्ली विधानसभा का चुनावी रण जीतने के लिए हर विधानसभा में बनाए गए लगभग 1500 लोकल प्रभारियों के पार्टी छोड़ देने की वजह से पार्टी का सत्ता पाने का सपना अधर में लटक गया है। सपने के अधर में लटक जाने के बाद पार्टी अब इस सोचा विचार में लगी है कि इतने कम समय में प्रचार के लिए कैसी रणनीति बनाई जाए, जो इन लोकल प्रभारियों की कमी की कसर को पूरा करे।

दस हजार कार्यकर्ता कर रहे हैं दिल्ली में प्रचार:
आम आदमी पार्टी का कहना है कि अभी भी दिल्ली के चुनाव में दस हजार से अधिक कार्यकर्ता पार्टी के लिए प्रचार का काम कर रहे हैं। पार्टी नेता संजय सिंह का कहना है पार्टी के हर विधानसभा में कार्यकर्ता पूरी निष्ठा और लगन से पार्टी का काम कर रहे हैं, जिससे उन्हें विश्वास है कि पार्टी को विधानसभा के चुनाव में इसका फायदा होगा।

जबरदस्ती के बनाए गए थे सदस्य :
आम आदमी पार्टी के गठन के समय बनाए गए लोकल प्रभारी जबरदस्ती बनाए गए थे। पार्टी के सूत्र कहते हैं कि चुनावी माहौल बनाने की आतुरता के चलते कई लोगों को जबरदस्ती लोकल प्रभारी बना दिया था।

उनके घर पर पार्टी का पोस्टर लगा दिया था।  बताया जाता है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं ने  आनन-फानन में कुछ लोगों को केवल फोन नम्बर के आधार पर ही लोकल प्रभारी बना दिया था। पर जब पार्टी के लिए प्रचार और काम करने की बात आई तो किसी प्रभारी के नम्बर बदल गए, तो किसी ने फोन ही बंद कर दिया। मोबाइल नम्बर बदल जाने के चलते पार्टी लोकल प्रभारियों से संपर्क नहीं कर पाई, जिसकी वजह प्रभारी पार्टी से दूर हो गए।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You