नौकरशाहों के लिए तय हो कार्यकाल

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Friday, November 01, 2013-12:37 PM

नई दिल्ली (भाषा): उच्चतम न्यायालय ने अपने एक अहम फैसले में कहा कि नौकरशाहों को राजनीतिक आकाओं के मौखिक आदेशों पर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। न्यायालय ने इसके साथ ही नौकरशाहों के आए दिन होने वाले तबादलों की परम्परा को खत्म करने और उन्हें राजनीतिक हस्तक्षेप से बचाने के लिए उनका तय कार्यकाल सुनिश्चित करने का सुझाव दिया है। 

नौकरशाही के कामकाज में आमूलचूल सुधारों का सुझाव देते हुए न्यायाधीश के.एस. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पीठ ने वीरवार को कहा कि संसद को एक कानून बनाना चाहिए जो नौकरशाहों की नियुक्ति, तबादले तथा उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का नियमन कर सके। नौकरशाही में गिरावट का मुख्य कारण राजनीतिक हस्तक्षेप को बताते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा कि नौकरशाहों को राजनीतिक नेताओं के सभी आदेशों पर कार्रवाई उनसे मिले लिखित संवाद के आधार पर करनी चाहिए।

पीठ ने यह भी कहा है कि एक नौकरशाह को एक तय न्यूनतम कार्यकाल दिए जाने से न केवल पेशेवराना अंदाज और प्रभावशीलता को प्रोत्साहन मिलेगा बल्कि अच्छा प्रशासन भी कायम होगा  उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि केंद्र शासित प्रदेशों समेत केंद्र और सभी राज्य सरकारें नौकरशाहों को तय कार्यकाल उपलब्ध करवाने के लिए 3 महीने के भीतर निर्देश जारी करें । 

उच्चतम न्यायालय के इस फैसले के पहले डी.एल.एफ.-राबर्ट वाड्रा भूमि सौदे को लेकर हरियाणा कैडर के आई.ए.एस. अधिकारी अशोक खेमका और उत्तर प्रदेश कैडर की आई.ए.एस. अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल से जुड़े विवाद सामने आए थे। पूर्व कैबिनेट सचिव टी.एस. आर. सुब्रमण्यम ने कहा कि यह ऐतिहासिक फैसला है और लोक सेवक निजी सेवक नहीं हैं। 


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