दागी नेताओं के भरोसे हैं छोटी सियासी पार्टियां

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Friday, November 01, 2013-1:45 PM

नई दिल्ली : दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा व कांग्रेस जैसी बड़ी राजनीतिक पार्टियों के बीच छोटी-छोटी राजनीतिक पार्टियां भी अपना भाग्य आजमा रही हैं। यह बात दीगर है कि इन पार्टियों के प्रतिनिधि जीत दर्ज करने में सफल नहीं हो पाते हैं, लेकिन इनके बढ़ते मत प्रतिशत ने बड़ी राजनीतिक पार्टियों को परेशानी में डालना शुरू कर दिया है। खास बात यह है कि पिछले दिल्ली विधानसभा चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी व लोक जनशक्ति पार्टी ने एक-एक सीटों पर जीत दर्ज की तो बहुजन समाज पार्टी के सिर 2 सीटों पर जीत का सहरा बंधा। इससे भी बड़ी बात यह रही कि दिल्ली नगर निगम चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने 5 सीटें जीत कर सबको हैरान कर दिया जिसमें निगम की 4 सीटें तो एक ही विधानसभा से जीतकर सभी पार्टियों का सुपरा ही साफ कर दिया। 

वहीं दूसरी पार्टियां भी तेजी से उभर रही है। राकंपा के प्रवक्ता व महासचिव सुनील अत्री कहते हैं कि दिल्ली की जनता कांग्रेस पार्टी के 15 वर्षों के कार्यकाल से तंग आ चुकी है। यही वजह है कि वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में हमारा मत प्रतिशत 1.38 तक पहुंच गया है। वहीं सपा, बसपा, राजद, लोजपा व जदयू भी मजबूती से उभर रही है। इन पार्टी के नेताओं की मानें तो हमारी नजर लोगों की बुनियादी समस्याओं के साथ बड़ी पार्टी के उन नेताओं पर होती है, जो चुनाव की तैयारी कर तो रहे होते हैं, लेकिन गुटबाजी के वजह से उन्हें टिकट नहीं मिल पाता है। 


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