दीपावली पर आदिवासियों की पुरातन परम्पराएं आज भी जीवंत

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Saturday, November 02, 2013-11:23 AM

जयपुर: राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों में दीपावली की ढेरों रोचक प्रथाएं और पुरातन परम्पराएं आज भी जीवंत है। वहीं आधुनिक सरोकार भी इसमें जुडकर दीपावली के सांस्कृतिक वैभव को और रोचक बनाते है। राजस्थान के आदिवासी इलाके डूंगरपुर और बांसवाडा इलाके  में दीपावली त्योहार का एक अलग अंदाज है।

प्रकृति के बीच रमे हुए आदिवासियों के लिए दीपावली सबसे बडा उल्लास का पर्व है। जब मेल मिलाप एवं सामूहिक उल्लास भरी जीवंत संस्कृति हर कहीं पूरे यौवन के साथ निखर जाती है। वैसे तो दीपावली देश के तमाम हिस्सों में परम्परा और उल्लास के साथ मनायी जाती है। विभिन्न जाति सम्प्रदाय वनवासियों और भारत वर्ष के बीहड वनीय क्षेत्रों में कंदराओं तक दीपावली अनेक लोक परम्परा और लोक अनुष्ठानों के साथ रोचक रप से मनाते है।

राजस्थान के मध्यप्रदेश और गुजरात के सरहदी संस्कृति की गूंज के साथ बहने वाली माही नदी और इसकी शाखाओं के तटों पर आदि काल से निवास कर रही जनजातियों में दीपावली कई पुरातन प्रथाओं और लोक रस्मों के साथ मनाई जाती है। बागड अंचल के आदिवासी जिले बांसवाडा और डूंगरपुर में दीपावली की धूम एक .दो दिन में नही सिमट जाती बल्कि यहां पूरे पखवाडे  मौज मस्ती का माहौल रहता है।


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