दिल्ली गैंगरेप मामला: साजिश बना निकलते थे सड़कों पर

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Saturday, November 02, 2013-3:30 PM

नई दिल्ली : वसंत विहार सामूहिक दुष्कर्म मामले में फांसी की सजा पाए चारों अभियुक्तों की सजा के पुष्टिकरण के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय में चल रही सुनवाई में शुक्रवार से अभियोजन पक्ष ने अपनी दलीलें देनी शुरू कर दी है।

अभियोजन पक्ष ने कहा कि सभी चारों अभियुक्तों ने इस घटना को अचानक से अंजाम नहीं दिया,बल्कि वह अपराध को अंजाम देने के इरादे से ही अपने घर से निकले थे।  सामूहिक दुष्कर्म की घटना से पूर्व एक अन्य व्यक्ति से लूटपाट किया जाना, उनकी इस मंशा को जाहिर करता है। न्यायमूर्ति रेवा खेतरापाल व न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी की खंडपीठ के समक्ष यह दलीलें दी गई हैं। खंडपीठ ने कहा कि इस मामले की जल्द सुनवाई के लिए बुधवार से इस मामले में प्रतिदिन सुनवाई की जाएगी।   
         
अब इस मामले में छह नवम्बर को सुनवाई होगी। दिल्ली पुलिस के अधिवक्ता दयान कृष्णन ने फांसी की सजा की पुष्टि की कार्यवाही अपनी जिरह शुरू करते हुए कहा कि 16 दिसम्बर 2012 को बस चालक राम सिंह, उसका भाई मुकेश, विनय शर्मा, पवन गुप्ता, अक्षय ठाकुर और एक नाबालिग आपराधिक वारदात लूट एवं दुष्कर्म इत्यादि को अंजाम देने के उद्देश्य से ही घर से निकले थे। यही वजह थी कि इन सभी ने पहले कारपेंटर रामाधार को लूटा और उसके बाद दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया।

 पीड़िता से सामूहिक दुष्कर्म के बाद अमानवीय व्यवहार भी किया गया जिसके कारण पीड़िता बच न सकी और 29 दिसम्बर 2012 को सिंगापुर के एक अस्पताल में उसकी मौत हो गई। मामले के एक आरोपी राम सिंह की मौत हो चुकी है। जबकि नाबालिग को बाल न्यायालय अधिकतम 3 साल  की सजा सुना चुका है। उक्त चारों अभियुक्तों मुकेश, विनय, पवन और अक्षय को निचली अदालत ने फांसी की सजा दी थी।


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