देश को बदलते शक्ति समीकरण पर अवश्य ही ध्यान देना चाहिए: प्रणब

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Monday, November 04, 2013-8:10 PM

नई दिल्ली: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शक्ति संबंधों में लगातार बदलाव होने की बात का जिक्र करते हुए आज कहा कि जब तक कोई भी देश अपने आस पास हो रहे बदलाव को नहीं समझेगा और खुद को उस के अनुसार नहीं ढालेगा, तब तक उसकी सुरक्षा पर गंभीर खतरा रहेगा।

‘नेशनल डिफेंस कॉलेज’ के 53वें पाठ्यक्रम के संकाय और पाठ्यक्रम सदस्यों से मुलाकात के मौके पर राष्ट्रपति ने कहा कि वैश्विक माहौल ने अपनी गतिशील प्रकृति के चलते विश्व के नेताओं और नीति निर्माताओं के समक्ष कई चुनौतियां पेश की है। मुखर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि जिस गति से हाल के समय में घटनाक्रम हुए हैं वो एक दशक पहले नहीं देखे जा सकते थे।

राष्ट्रपति ने कहा कि प्रत्येक देश के कार्य अपने राष्ट्रीय हितों और उद्देश्यों से निर्देशित होते हैं। शक्ति संबंधों में लगातार बदलाव हो रहे हैं और जब तक कोई देश अपने आस पास हो रहे इन बदलावों को नहीं समझेगा तथा खुद को उनके अनुकूल नहीं ढालेगा तब तक उसकी खुद की सुरक्षा पर गंभीर खतरा रहेगा।’’

उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्र की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह सभी उपलब्ध संसाधनों का दोहन कितना प्रभावी तरीके से करता है। इनमें सबसे प्रमुख मानव संसाधन है। राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘हमारी तरह की लोकतांत्रिक प्रणाली में ‘राज्य’ के विभिन्न अंगों को एक दूसरे की शक्तियों और सीमाओं को अवश्य समझना चाहिए। राजनीतिक नेतृत्व और नागरिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों को रक्षा बलों की क्षमताओं और सीमाओं से अवश्य ही अवगत होना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि इसी तरह से सशस्त्र बलों के अधिकारियों को उन सीमाओं और संवैधानिक ढांचे को समझने की जरूरत है जिसके तहत राजनीतिक प्रणाली और नागरिक सेवा काम करती है। हालांकि इन दोनों को ही राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक परिप्रेक्ष्य से अवगत होना चाहिए ताकि अहम फैसले लिए जा सकें।


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