देश में सांप्रदायिक हिंसा पर राष्ट्रपति ने जताई चिंता

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Tuesday, November 05, 2013-4:39 PM

हैदराबाद: देश के कुछ हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा पर चिंता जताते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज इन तनावों से प्रारंभिक चरणों में ही निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन की सामथ्र्य को मजबूती देने की वकालत की। राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘हमारे पुलिस बलों के लिए यह चुनौतीपूर्ण समय है। देश के कुछ हिस्सों में समुदायों के बीच बैरभाव के साथ चिंता पैदा करने वाली सांप्रदायिक हिंसा का माहौल है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह के तनावों का पता उनके शुरूआती चरणों में ही लगा लेने के लिए और उनसे तत्काल निपटने के जरूरी उपाय करने के लिए हमारे जिला स्तरीय और स्थानीय प्रशासन की सामथ्र्य को मजबूती देने की जरूरत है।’’

मुखर्जी हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में भारतीय पुलिस सेवा के प्रोबेशनर्स की दीक्षांत परेड का निरीक्षण करने के अलावा उन्हें संबोधित कर रहे थे।राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि भारत आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर खतरे का सामना करने के अलावा दूसरे देशों से आने वाले आतंकवाद का भी निशाना बना हुआ है।उन्होंने कहा, ‘‘सरकार वामपंथी अतिवाद से समग्र रूप से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है।

यह अतिवादियों के खिलाफ द्विआयामी तरीका अपना रही है, जिसमें उनके खिलाफ अति-सक्रिय और निरंतर अभियान चला रही है और अतिवाद प्रभावित इलाकों में विकास और शासन प्रणाली के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।’’ उन्होंने कहा कि देश को इन चुनौतियों से सीधे निपटना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, ‘‘हमारे पुलिस बलों को जनता के मानवाधिकारों और संविधान का सम्मान करना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि भारत के पहले गृहमंत्री ने बड़ी अपेक्षाओं के साथ अखिल भारतीय सेवाओं की शुरूआत की थी। पटेल चाहते थे कि लोकसेवक प्रशासन में सर्वोच्च निष्पक्षता और भ्रष्टाचार से मुक्त व्यवहार बनाकर रखें। पटेल ने लोकसेवकों को राजनीति में शामिल न होने और खुद को सांप्रदायिक झगड़ों से दूर रहने की भी सलाह दी थी।
 


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