सुनिश्चित हो किन्नरों की पहचान: डॉ राजेश

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Tuesday, November 05, 2013-4:45 PM

नई दिल्ली: किन्नरों के अधिकार और उनकी अस्मिता को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय के नार्थ कैंपस में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठि में किन्नरों के सामने आ रही मूलभूत समस्याओं के बारे में विस्तार से चर्चा की गई।

किन्नरों को शिक्षा और रोजगार मुहैया कराने के बारे में भी से चर्चा हुई। संगोष्ठी  में  दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं कुछ किन्नरों ने हिस्सा लिया।

दिल्ली विवि द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में के प्रौढ़ शिक्षा एवं सतत विस्तार विभाग विभाग के प्रमुख डॉ. राजेश ने बताया कि किन्नरों को सामाजिक भागीदारी और जनशिक्षण संस्थानों के साथ जोड़कर कार्यकुशल बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज शारीरिक रूप से अक्षम लोगों की संख्या से अधिक देश में किन्नरों की संख्या है, लेकिन आधार कार्ड, पासपोर्ट और मतदाता पहचान पत्र में इनके लिंग को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश न होने से इनको परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए इनको स्त्री व पुरुष के अलावा तीसरे लिंग के रूप में मान्यता दी जाए। जिससे इनकी पहचान सुनिश्चित हो सके। सुप्रीम कोर्ट ने इनकी स्थिति स्पष्ट करने के लिए विस्तार योजना के तहत सुझाव मांगे हैं। जिसके संदर्भ में संगोष्ठी का आयोजन किया गया।


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