बच्चों काे कम उम्र में शादी से बचाना है तो दें नैतिक शिक्षा

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Tuesday, November 05, 2013-4:52 PM

नई दिल्ली : अगर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चों भागकर शादी न करें तो उन्हें अपने बच्चों को नैतिक शिक्षा देनी चाहिए,न कि किसी के खिलाफ झूठे दुष्कर्म व अपहरण के मामले दर्ज  करा दें।

यह सलाह देते हुए दिल्ली की एक कोर्ट ने अपहरण व दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी एक युवक को बरी कर दिया है। इस युवक पर आरोप था कि उसने अपनी प्रेमिका का अपहरण करके उससे दुष्कर्म किया था।

अदालत ने कहा कि बिहार निवासी आरोपी युवक का यह दुर्भाग्य था कि वह इस मामले में गिरफ्तार हुआ और उसे यह मामला झेलना पड़ा। जबकि उसने कोई आपराधिक कार्य नहीं किया था और अंत में उसे बरी होना ही था। अदालत ने कहा कि आजकल मोबाइल फोन, इंटरनेट व केबल टी.वी. आदि ने घरों के अंदर सड़कें बना दी हैं। ऐसे में माता-पिता की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह अपने बच्चों को नैतिक शिक्षा व नैतिक मूल्य शिक्षाएं ताकि वह अच्छे नैतिक मानक तय कर सकें।

जिसके बाद वह अच्छे,बुरे व दिखावें में अंतर कर पाएं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विरेंद्र भट्ट ने कहा कि इस तरह झूठे दुष्कर्म के मामले दर्ज करवाकर इस समस्या को दबाया नहीं जा सकता है। बच्चों को अच्छे-बुरे का फर्क बताना ही होगा। भागकर शादी करने की इस समस्या को अगर खत्म करना है तो बच्चों  को अच्छी नैतिक शिक्षा देनी होगी और उन पर ज्यादा निगरानी रखनी होगी।

इस मामले में आरोपी युवक एक नाबालिग लड़की से प्यार करता था। इसलिए उसने उससे भागकर शादी कर ली। मार्च 2010 को 13 वर्षीय पीड़िता के माता-पिता ने इस मामले में अपनी बेटी के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में पीड़िता ने बरामद होने के बाद अपने आप को बालिग बताया और कहा कि अपनी मर्जी से गई थी।

 जब बिहार में इस लड़की को बरामद किया गया तो उनकी शादी हो चुकी थी और लड़की गर्भवती थी। लड़की ने अदालत को बताया कि वह अलग-अलग धर्म से संबंध रखते थे। इसलिए उनके प्यार व शादी का विरोध किया गया और मजबूरी में उनको भागकर शादी करनी पड़ी।


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