उच्च न्यायालय ने एक व्यक्ति को ऐहतियातन हिरासत में रखने का आदेश खारिज किया

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Wednesday, November 06, 2013-11:47 AM

मुंबई: बंबई उच्च न्यायालय ने एक व्यक्ति को राज्य कानून के तहत हिरासत में रखने के नागपुर पुलिस आयुक्त के एक आदेश को खारिज कर दिया और उल्लेख किया कि ऐहतियातन हिरासत से संबंधित कानून का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। सतीश समुदे्र (33) ने अपनी हिरासत को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उसे एमपीडीए कानून के तहत हिरासत में लिया गया था ।

अदालत ने उल्लेख किया कि बंद कमरे में हुए दो व्यक्तियों के बयानों में तारीख, समय और स्थान आदि का ब्यौरा नहीं है। इन व्यक्तियों के बयानों के आधार पर ही समुद्रे को हिरासत में लिया गया था। इन लोगों ने समुदे्र की ओर से धमकियां मिलने की बात कही थी ।


न्यायमूर्ति अभय ओक और रेवती मोहिते डेरे ने कहा कि इस तरह के ब्यौरे को छिपाने के लिए बंद कमरे में हुए बयानों में खाली जगह छोड़े जाने से याचिकाकर्ता घटनाओं की तारीख, समय और स्थान के बारे में जानने से वंचित रहेगा। याचिकाकर्ता ने कहा कि हिरासत का आदेश देने वाले अधिकारी ने हिरासत के लिए बंद कमरे में दर्ज हुए गवाहों ‘ए’ और ‘बी’ के दो बयानों पर विचार किया । ये बयान संदिग्ध और निराधार हैं जिनमें गवाहों ने घटनाओं की तारीख, समय और स्थान का जिक्र नहीं किया और इस ब्यौरे को खाली छोड़ दिया। बंदी ने कहा कि परिणामस्वरूप वह मामले में प्रभावी पैरवी नहीं कर सकता।

हालांकि हिरासत आदेश देने वाले अधिकारी ने कहा कि इन ब्यौरों का खुलासा इसलिए नहीं किया गया क्योंकि गवाह याचिकाकर्ता की आपराधिक गतिविधियों में लिप्तता के चलते डरे हुए हैं ओैर उन्हें अपनी जान ओ माल का खतरा है। न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘वर्तमान मामले में अस्पष्टता है । समय, सप्ताह, महीने, वर्ष और स्थान को बंद कमरे में हुए बयानों में खाली छोड़े जाने का कोई औचित्य नहीं है, विशेषकर तब, जब हिरासत संबंधी आदेश में इसका स्पष्ट संदर्भ हो ।’’
 


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