‘बीवी को सेक्स से वंचित करना अत्याचार’

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Wednesday, November 06, 2013-11:49 AM

मुंबई: मुंबई की एक स्थानीय अदालत ने तलाक के एक मामले में अपना फैसला देते हुए कहा कि पत्नी को शारीरिक संबंध बनाने से वंचित रखना अत्याचार के बराबर है। एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक, अदालत ने 27 वर्षीय महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रतिवादी (पति) को महिला के चरित्र पर शक करने और इसे सेक्स से वंचित रखने का कोई अधिकार नहीं हैं। अगर वह ऐसा करता हैं तो ऐसा व्यवहार अत्याचार कहलाए जाने के काबिल है।

अदालत ने इस मामले में अपना फैसला देते हुए 33 वर्षीय शख्स को महिला को 3 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया है। शादी से पहले यह दोनों दो साल से रिलेशनशिप में थे। इसके बाद फरवरी 2009 में इन्होंने शादी कर ली, फरवरी 2012 में महिला ने तलाक के लिए याचिका डाल दी। महिला का आरोप हैं कि पहले तो उसके पति ने शादी स्वीकार करने से मना कर दिया, फिर ससुराल वालों ने उनके पिता द्घारा मुहैया करवाएं गए कमरे पर भी अपना कब्जा कर लिया हैं।

महिला का कहना हैं कि  नौकरी जाने की वजह से वह तनाव मे में चला गया और अक्टूबर 2009 तक बेरोजगार ही रहा। इसके बाद महिला की सास पर इसके साथ गाली गलौज करने लगी और बार-बार घर छोडऩे को कहती। महिला के मुताबिक, हालात तब खराब हो गए जब उसके पति ने उसके चरित्र पर शक किया। अदालत ने कहा कि चरित्र महिलाओं के लिए सबसे अहम होता है। शादी से जहां जिम्मेदारी और अधिकार आते हैं। वही, शारीरिक संबंध भी शादी के सबसे बुनियादी दायित्वों में से है। इसलिए किसी को भी एक-दूसरे को शादी के सुख से वंचित करने का अधिकार नहीं है।


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