फर्जी नियुक्ति के आरोपी को जमानत देने से इनकार

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Wednesday, November 06, 2013-3:53 PM

नई दिल्ली: पैसे लेकर कलस्टर बसों में फर्जी कागजात के आधार पर ड्राईवर व कंडक्टर की नियुक्ति करने वाले एक गिरोह से जुड़े एक आरोपी प्रमजीत को दिल्ली उच्च न्यायालय ने जमानत देने से इंकार कर दिया है।

न्यायमूर्ति सुनीता गुप्ता ने कहा कि अभियोजन पक्ष का कहना है कि पूरा एक संगठित रैकेट चल रहा था,जो पैसे लेकर फर्जी कागजात पर नियुक्ति कर रहा था। दो गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं,जिनसे आरोपियों ने नियुक्ति के लिए 65-65 हजार रुपए भी लिए थे। इतना ही नहीं पांच फर्जी ड्राईविंग लाइसेंस व अन्य कागजात भी मिले हैं।

मामले की जांच अभी प्रारंभिक स्टेज पर है और आम जनता का हित इस मामले में जुड़ा है। आरोपी इस गिरोह से जुड़ा हुआ है। ऐसे में उसे अभी जमानत दी गई तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए उसे जमानत नहीं दी जा सकती है। इस मामले का खुलासा करते हुए क्राइम ब्रांच ने पिछले दिनों एक मामला दर्ज किया था।

गिरोह के सदस्य लोगों को कलस्टर बसों में ड्राईवर व कंडेक्टर की नौकरी दिलवाने के नाम पर 70-70 हजार रुपए लेते थे। जिसके बाद वह फर्जी कागजात के आधार पर इन लोगों को नौकरी दिला रहे थे।

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि आरोपी प्रमजीत मैसर्स प्रेहारी प्रोटेक्शन सिस्टम नामक प्राइवेट फर्म का असिस्टेंट निदेशक था। वह कलस्टर बसों के लिए कंडक्टर नियुक्त करें और उनके कागजातों की जांच करें।


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