जमीन अधिग्रहण के बाद भी नहीं लगाए गए पौधे

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Wednesday, November 06, 2013-4:16 PM

नई दिल्ली : दिल्ली में 2010 में हुए कॉमनवैल्थ गेम्स (सी.डब्ल्यू.जी.) के दौरान यहां नए फ्लाईओवर, अंडर पास, मैट्रो लाइनों का विस्तार व उच्च गति बस कॉरिडोर जैसी सार्वजनिक हित के विकास कार्य हुए।

इन कार्यों के चलते काफी संख्या में पेड़ भी काटे गए जिसकी क्षतिपूॢत स्वरूप इन जगहों पर पौधे लगाए जाने की योजना थी, लेकिन इन जगहों पर किकर के पेड़ों के अलावा और किसी तरह के पेड़-पौधों का नामोनिशान तक नहीं है, जबकि यहां पीपल, नीम शीशम समेत आदि पेड़ लगाने थे।

क्या थी परियोजना:
दिल्ली मे विभिन्न परियोजनाओं को पूरा करने के अंतर्गत काटे गए पेड़ों की क्षतिपूॢत के लिए सभी विभागों ने दिल्ली के वन विभाग को राजधानी में कुछ जगहों पर पौधे लगाने के लिए मुआवजा दिया था।

शाहपुर गढ़ी, नासिरपुर, मखमेलपुर, मामुरपुर जैसी जगहों को  चिन्हित किया गया था। इन्हीं में एक बाहरी दिल्ली का सुल्तानपुर डबास गांव भी था। यहां की लगभग 3 किलोमीटर क्षेत्र में फैली जमीन को वन विभाग ने करीब 3 साल पहले अधिकृत किया था।

यह है वर्तमान स्थिति:
अधिग्रहण के बाद विभाग ने इसकी चारदिवारी भी करवाई थी जिसका वर्तमान में नामोनिशान  तक नहीं है। दिवार जगह-जगह टूटी पड़ी है। ग्रामीण ईटें तक चुरा ले गए है। कॉमनवैल्थ खेलों के बाद 3 साल बीत चुके है, लेकिन यहां पर पौधे लगाने का कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है।

 वर्तमान में यहां पर सिर्फ घास, किकर के पेड़ व जंगाली पौधे है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम कर्मचारी आस-पास इलाकों से लाकर मरे हुए पशुओं को इसी वन के भीतर फेंककर जाते हैं। संजीव कुमार, प्रवक्ता, वन विभाग का कहना है कि इस बारे में अभी कुछ पता नहीं है। इस मसले पर संबंधित कर्मचारियों से बात कर जानकारी उपलब्ध करवाई जाएगी।

 


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