जो थे खास, उन्हें ही मिला कमल का टिकट

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Thursday, November 07, 2013-1:31 PM

नई दिल्ली (अशोक शर्मा): भाजपा में मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित होने के बाद डॉ. हर्षवर्धन बेशक पार्टी के सभी विधायकों को पुन: चुनाव मैदान में उतारने में सफल हो गये हैं, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष विजय गोयल भी अपने चहेतों को टिकट दिलाने में कामयाब रहे। दरअसल चली सबकी है। चाहे वो दिल्ली प्रभारी नितिन गडकरी हों या फिर अरुण जेतली, सुषमा स्वराज या विजय कुमार मल्होत्रा। बता दें, नितिन गडकरी ने विधायकों के साथ-साथ सभी विधानसभा क्षेत्रों का सर्वे करवा रखा था।

सर्वे में जो बातें सामने आईं थीं उसी के अनुसार उन्होंने पार्टी के अन्य नेताओं से बातचीत करने के बाद ही उम्मीदवारों का चयन किया। डॉ. हर्षवर्धन और विजय गोयल के बीच सबसे पहले सभी विधायकों को टिकट देने की बात को लेकर मनमुटाव हुआ था। गोयल चाहते थे कि पार्टी के जिन विधायकों के कामकाज की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं रही है उन्हें टिकट नहीं दिया जाए। इन विधायकों में धर्मवीर सोलंकी, प्रद्युमन राजपूत, कुलवंत राणा, श्रीकृष्ण त्यागी, जयभगवान गोयल आदि का नाम था। पर सीएम पद का प्रत्याशी घोषित होने के बाद डॉ. हर्षवर्धन ने साफ कर दिया था कि वह किसी भी विधायक का टिकट काटने के पक्ष में नहीं हैं। गोयल ने कुछ समय पहले ही मंत्री राजकुमार चौहान के करीबी रामकिशोर नरवारिया को कांग्रेस से भाजपा में शामिल कराया था और अब उन्हें मंगोलपुरी से टिकट दिलाया है।

बादली से विजय भगत प्रदेश अध्यक्ष के साथ-साथ सुषमा स्वराज के खास बताये जाते हैं। रोहिणी से जयभगवान गोयल और शालीमार बाग से रवीन्द्र बंसल को पुन: टिकट दिलाकर गोयल ने एक तीर से दो शिकार किये हैं। दरअसल विजेन्द्र गुप्ता ने इन दोनों क्षेत्रों से टिकट के लिए आवेदन किया था। अब पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ नई दिल्ली से प्रत्याशी बनाया है। इसके साथ ही किराड़ी से अनिल झा, सदर से जयप्रकाश, चांदनी चौक से सुमन गुप्ता, मटियाला से राजेश गहलौत, नजफगढ़ से अजित खडखड़ी, देवली से गगनश्रीलाल प्रधान, लक्ष्मी नगर से अभय वर्मा (एडवोकेट) भी गोयल खेमे के माने जा रहे हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि विजय गोयल माडल टाउन से अपने करीबी व प्रदेश पार्टी के कोषाध्यक्ष अशोक गोयल तथा सदर से जयप्रकाश को टिकट दिलाना चाहते थे और कामयाब भी रहे।

इसके अलावा विजय कुमार मल्होत्रा खुद चुनाव न लड़कर अपने बेटे अजय मल्होत्रा को ग्रैटर कैलाश से,  राजीव बब्बर को तिलक नगर से, कोंडली से दुष्यंत गौतम को और आर के पुरम से पूर्व उपमहापौर अनिल शर्मा को टिकट दिलाने में सफल रहे। गडकरी चाहते थे कि वी. के. मल्होत्रा खुद चुनाव लड़े, क्योंकि उनके सर्वे में मल्होत्रा का ही नाम था उनके बेटे अजय का नहीं। काफी जद्दोजहद के बाद  मल्होत्रा भी गडकरी को समझाने में सफल रहे। डॉ. हर्षवर्धन चाहते थे कि जंगपुरा से मनोज जैन को खड़ा किया जाए लेकिन पलड़ा अनन्त कुमार के समर्थक पंकज जैन का भारी रहा। 
 

Edited by:Jeta

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