टिकट बंटवारे में पूर्वांचलियों की अनदेखी

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Thursday, November 07, 2013-1:59 PM

नई दिल्ली (धनंजय कुमार): अपने भाषणों में पूर्वांचलियों को प्राथमिकता के आधार पर दिल्ली विधानसभा चुनाव में टिकट देने का दावा करने वाली भाजपा ने इस बार भी पूर्वांचली नेताओं को उपेक्षित कर दिया है। पूर्वांचलियों की उपेक्षा का आलम यह है कि भाजपा ने जिन 62 प्रत्याशियों के नाम की सूची जारी की है उसमें सिर्फ चार प्रत्याशी पूर्वांचली हैं,  जिसमे अनिल झा पहले से ही विधायक हैं और अभय वर्मा, विजय भगत तथा कौशल मिश्रा पूर्वांचली नेता हैं। जबकि पार्टी की ओर से 10-12 पूर्वांचली प्रत्याशियों को टिकट देने की चर्चा थी। क्योंकि पार्टी के अपने ही सर्वे में यह बात सामने आई थी कि  70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में 24 सीटों पर पूर्वांचली मतदाताओं का दबदबा है।

पार्टी के इसी सर्वे के बाद प्रदेश चुनाव प्रभारी नितिन गडकरी ने न सिर्फ सत्ता में आने पर छठ पूजा को सार्वजनिक अवकाश देने की घोषणा की थी, बल्कि टिकट बंटवारे में पूर्वांचली नेताओं को प्राथमिकता देने की भी बात कही थी। इसके बाद ही पूनम आजाद व अमन सिन्हा जैसे पूर्वांचली नेता बड़े जोश के साथ चुनाव की तैयारी में लग गए थे, लेकिन सूची आने के बाद इन नेताओं के हाथ मायूसी लगी है और इसका प्रभाव विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है।

भाजपा की ओर से ही कराए गए सर्वेक्षणों में किए गए दावों की मानें तो 70 में से 27 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जिनमें पूर्वांचली मतदाता 2.38 प्रतिशत तक हैं। सर्वें के अनुसार पूर्वी दिल्ली के 13 विधानसभा क्षेत्रों में पूर्वांचली मतदाताओं का दबदबा है तो पश्चिमी दिल्ली के पांच विधानसभा क्षेत्रों में इनकी स्थिति काफी मजबूत है। इसी तरह उत्तरी दिल्ली के पांच विधानसभा और दक्षिणी दिल्ली के चार विधानसभा क्षेत्रों में पूर्वांचली मतदाताओं का मत प्रतिशत 24 से 31 प्रतिशत तक है। साफ  है कि यदि प्रवासी मतदाता किसी एक पार्टी के समर्थन में खड़े हो जाएंगे तो उसके  उम्मीदवार के लिए जीत की राह बेहद आसान हो जाएगी।
 

Edited by:Jeta
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