टिकट बंटवारे के बाद उठे बगावती सुर

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Friday, November 08, 2013-11:27 AM

नई दिल्ली (धनंजय कुमार): टिकट बंटवारे को लेकर प्रदेश भाजपा में घमासान मच गया है। बुधवार को भाजपा ने अकालियों को 4 सीटें देकर दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों का ऐलान किया था। 24 घंटे भी नहीं बीते कि प्रत्याशियों के नामों को लेकर कलह सामने आ गई।
हरिनगर, महरौली, सीलमपुर, शकूरबस्ती, कालकाजी, लक्ष्मी नगर, मटियाला, कालकाजी, ग्रेटर कैलाश, बदरपुर समेत एक दर्जन सीटों को लेकर महाभारत छिड़ी  है। जिन्हें टिकट नहीं मिला है उनके समर्थकों ने भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह, प्रदेश चुनाव प्रभारी नितिन गडकरी तथा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विजय गोयल समेत तमाम बड़े नेताओं से शिकायत की है। वैसे दिग्गज नेता जरूर कह रहे हैं कि वो बगावती सुर उठाने वालों को मना लेंगे।

वहीं भाजपा ने हरिनगर से विधायक हरशरण सिंह बल्ली को मनाने की कवायद तेज कर दी है, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं। प्रदेश प्रभारी नितिन गडकरी ने बल्ली को मिलने के लिए वीरवार शाम 5 बजे आवास पर बुलाया था, लेकिन उन्होंने जाने से मना कर दिया। उन्हें मनाने के लिए सुभाष आर्य, सुभाष सचदेवा तथा भरत भूषण मदान को भेजा गया था, लेकिन वह नहीं माने।

बल्ली ने इशारों - इशारों पाला बदलने का संकेत दे दिया है। उनका कहना है कि उनके सहयोगी जो फैसला करेंगे, वह वैसा ही करेंगे। वह शुरू से ही इस क्षेत्र की सेवा करते रहे हैं, लिहाजा पार्टी ने जो अन्याय किया है, उसका जवाब कार्यकर्ता ही देंगे। चर्चा है कि बल्ली निर्दलीय चुनाव लडऩे का मन बनाने के साथ कांग्रेस का दामन भी थाम सकते हैं।

गौरतलब है कि भाजपा ने हरिनगर सीट अकालियों के खाते में डाल दी है। हरी नगर वह सीट है जहां से बल्ली वर्ष1993 से लगातार चुनाव जीतते आए हैं। दूसरी ओर महरौली तथा सीलमपुर विधानसभा क्षेत्र के कार्यकत्र्ता पहले ही अपने नेताओं के समर्थन में विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। बदरपुर विधानसभा क्षेत्र में रामवीर सिंह बिधूड़ी के खिलाफ श्रीचंद चोकन ने मोर्चा खोल दिया है तो कालकाजी विधानसभा से टिकट मांग रहे पूर्व निगम पार्षद धर्मवीर सिंह ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

इधर, शकूरबस्ती से श्यामलाल गर्ग तथा मटियाला विधानसभा क्षेत्र से राजेश गहलोट के खिलाफ विरोध शुरू हो गया है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो, यदि असंतुष्टों को जल्द नहीं मनाया गया तो तमाम प्रमुख मुद्दों के बावजूद पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

Edited by:Jeta

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